Delhi High Court – मनीष सिसोदिया चुनाव याचिका पर अपील खारिज
Delhi High Court – दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 विधानसभा चुनाव से जुड़े एक मामले में दायर अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। यह अपील पटपड़गंज सीट से आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ दाखिल की गई थी। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के आदेश के विरुद्ध अपील का उचित मंच उच्च न्यायालय नहीं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय है।

खंडपीठ ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिकाओं से संबंधित अंतिम आदेशों के खिलाफ सीधी अपील सुप्रीम कोर्ट में की जाती है। ऐसे में इस अपील पर उच्च न्यायालय में विचार नहीं किया जा सकता।
पीठ ने यह भी संकेत दिया कि कानून में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद गलत मंच पर अपील दायर करना न्यायिक प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा करता है।
कानून का प्रावधान क्या है
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 116ए के अनुसार, चुनाव याचिका पर उच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतिम आदेश के विरुद्ध अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकती है। इसका उद्देश्य चुनाव संबंधी विवादों का शीघ्र और अंतिम निपटारा सुनिश्चित करना है।
खंडपीठ ने अपीलकर्ता को इसी प्रावधान की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि यदि वे एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती देना चाहते हैं, तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा।
किसने दायर की थी अपील
यह अपील प्रताप चंद्र की ओर से दायर की गई थी। उन्होंने 2020 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मनीष सिसोदिया के खिलाफ चुनाव लड़ा था। एकल न्यायाधीश द्वारा उनकी चुनाव याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्होंने खंडपीठ में चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान चंद्र स्वयं अदालत में उपस्थित थे। न्यायालय ने प्रारंभ में ही उन्हें संबंधित कानूनी प्रावधान पढ़ने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि यह मामला उच्च न्यायालय में विचार योग्य नहीं है।
अपील वापस लेने का निर्णय
अदालत की टिप्पणी के बाद अपीलकर्ता ने अपनी अपील वापस लेने का अनुरोध किया। खंडपीठ ने कहा कि चूंकि विवादित आदेश के खिलाफ अपील का उचित मंच सर्वोच्च न्यायालय है, इसलिए अपील वापस ली गई मानकर खारिज की जाती है।
इस प्रकार, उच्च न्यायालय में यह मामला समाप्त हो गया है और यदि अपीलकर्ता आगे बढ़ना चाहते हैं तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करनी होगी।
क्या थे आरोप
प्रताप चंद्र ने आरोप लगाया था कि मतदान समाप्ति से पहले निर्धारित 48 घंटे की अवधि के दौरान सिसोदिया द्वारा प्रचार गतिविधियां जारी रहीं। इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया था कि वर्ष 2013 में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज एक एफआईआर की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी गई। उनके अनुसार यह महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने के बराबर है।
एकल न्यायाधीश का पूर्व निर्णय
हालांकि, एकल न्यायाधीश ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि जिस आपराधिक मामले का उल्लेख किया गया, उसमें आरोप तय नहीं हुए थे। साथ ही यह भी स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया कि संबंधित एफआईआर की जानकारी प्रत्याशी को थी। अदालत ने माना था कि याचिकाकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में ठोस आधार प्रस्तुत करने में असफल रहे।



