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Delhi Assembly Pollution Protest: दिल्ली विधानसभा में हुआ हंगामा, प्रदूषण और राजनीति के बीच मास्क वाला प्रदर्शन

Delhi Assembly Pollution Protest: दिल्ली विधानसभा के चार दिवसीय शीतकालीन सत्र की शुरुआत किसी सामान्य विधायी कार्यवाही की तरह नहीं, बल्कि एक युद्ध क्षेत्र की तरह हुई। उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण के दौरान ही विपक्षी विधायकों ने (Air Pollution) के मुद्दे पर सदन के भीतर भारी शोर-शराबा शुरू कर दिया। इस हंगामे ने सदन की गरिमा को इस कदर प्रभावित किया कि स्पीकर को कड़ा रुख अपनाना पड़ा। स्थिति को अनियंत्रित होता देख कई विधायकों को मार्शल के जरिए बाहर निकाला गया, जिससे सत्र के पहले ही दिन राजनीतिक कड़वाहट खुलकर सामने आ गई।

Delhi Assembly Pollution Protest
Delhi Assembly Pollution Protest

विधायकों पर निष्कासन की गाज

सदन की कार्यवाही में बाधा डालने और अनुशासनहीनता के आरोप में आम आदमी पार्टी के चार विधायकों—संजीव झा, कुलदीप कुमार, सोमदत्त और जरनैल सिंह को अगले तीन दिनों के लिए (House Suspension) झेलना पड़ा है। विपक्षी विधायकों का ‘मास्क’ पहनकर सदन में आना और नारेबाजी करना सत्ता पक्ष और आसन को नागवार गुजरा। हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा, जिससे जनहित के मुद्दों पर होने वाली चर्चा बीच में ही लटक गई।

उपराज्यपाल का प्रगति कार्ड

अपने संबोधन में उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली सरकार की पिछले 10 महीनों की उपलब्धियों का बखान किया। उन्होंने इसे ‘अंत्योदय’ और ‘सर्वोदय’ के सिद्धांतों पर आधारित शासन बताया। एलजी ने एक लाख करोड़ रुपये के (Historical Budget) का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार व्यापार को सरल बनाने और नागरिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि प्रदूषण और यमुना की सफाई जैसी गंभीर समस्याएं अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, जिन्हें सुलझाने में समय लगेगा।

जहरीली हवा पर ‘आप’ का आक्रामक रुख

नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि दिल्ली के लोग जहरीली हवा में दम तोड़ रहे हैं, लेकिन सरकार चर्चा से भाग रही है। उन्होंने मास्क पहनकर प्रदर्शन (Political Protest) करने का बचाव किया और कहा कि जब जनता सांस नहीं ले पा रही, तो विधानसभा में चुप बैठना संभव नहीं है। आतिशी ने केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि पंजाब में पराली नहीं जल रही, तो दिल्ली की हवा इतनी खराब क्यों है?

डेटा और भ्रष्टाचार का आरोप-प्रत्यारोप

जहाँ एक तरफ आम आदमी पार्टी प्रदूषण के लिए बाहरी कारकों को जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं भाजपा नेता इसे दिल्ली सरकार की 11 साल की विफलता और भ्रष्टाचार (Systemic Corruption) का नतीजा बता रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि ‘आप’ विधायक केवल ध्यान भटकाने के लिए मास्क का नाटक कर रहे हैं। सत्ता पक्ष का कहना है कि सत्र नीतियों पर चर्चा के लिए था, लेकिन विपक्ष ने इसे केवल हंगामे का मंच बना दिया है।

दिल्ली की भलाई या राजनीतिक रसूख?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्र को ‘पॉलिसी और डिलीवरी’ का माध्यम बताते हुए सभी से शांतिपूर्ण चर्चा की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदूषण जैसे (Public Welfare) के मुद्दों पर समाधान निकालने के लिए सत्ता और विपक्ष दोनों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। 8 जनवरी तक चलने वाले इस सत्र में अब देखना यह होगा कि क्या दिल्ली की जनता को प्रदूषण से निजात दिलाने वाला कोई ठोस रोडमैप तैयार होता है या यह सत्र भी केवल आरोपों की भेंट चढ़ जाएगा।

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