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Dehradun Murder Case – भीड़ के बीच बेरहम हमला, मदद को नहीं बढ़े हाथ

Dehradun Murder Case – देहरादून के मच्छी बाजार से सटी एक संकरी गली में हुई गुंजन की हत्या ने शहर को झकझोर दिया है। सुबह के वक्त जब बाजार अपनी रोजमर्रा की हलचल में था, उसी दौरान हुई इस वारदात ने लोगों की संवेदनशीलता और सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटना के समय आसपास दर्जनों लोग मौजूद थे, फिर भी कोई गुंजन को बचाने के लिए आगे नहीं आया। उसकी सहेली पायल, जो मौके पर सबसे पहले पहुंची, अब भी उस खौफनाक मंजर को भूल नहीं पा रही है। अगले दिन भी वह गुंजन के परिवार के साथ खड़ी रही—कभी उसकी मां को संभालती, कभी भाई को ढांढस बंधाती। यह त्रासदी सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सामूहिक चुप्पी की कहानी भी बन गई है।

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हमले का वह क्षण

पायल ने बताया कि गुंजन रोज की तरह गली में अपनी गाड़ी खड़ी करने गई थी। उस सुबह भी सब कुछ सामान्य लग रहा था। थोड़ी देर पहले ही दोनों की मुलाकात हुई थी, लेकिन गुंजन ने जल्दबाजी का हवाला देकर अंदर आने से मना कर दिया था। इसके कुछ ही मिनट बाद चीख-पुकार सुनाई दी। पायल दौड़कर बाहर पहुंची तो देखा कि आरोपी आकाश धारदार चापड़ से लगातार गुंजन पर हमला कर रहा था। वह स्तब्ध रह गई, लेकिन उसने हिम्मत जुटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की।

डरी सहेली, पर कोशिश नहीं छोड़ी

पायल ने आकाश को धक्का देकर हटाने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ में चापड़ देखकर वह घबरा गई। आरोपी ने उसकी ओर भी हथियार तान दिया, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। इसके बावजूद पायल ने आसपास खड़े लोगों से मदद की गुहार लगाई। उसके मुताबिक, उस समय बाजार खुल चुका था और करीब 30 से 40 लोग घटनास्थल के आसपास मौजूद थे। फिर भी किसी ने बीच-बचाव करने की जहमत नहीं उठाई।

भीड़ की खामोशी

हमले के बाद आकाश आराम से भीड़ के बीच से निकल गया। किसी ने उसे रोकने या पकड़ने की कोशिश नहीं की। कई अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने भी इसकी पुष्टि की कि लोग तमाशबीन बने रहे। यह दृश्य इस बात को रेखांकित करता है कि सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा के समय समाज किस हद तक निष्क्रिय हो सकता है। स्थानीय लोगों में अब यह चर्चा आम है कि अगर समय रहते कोई हस्तक्षेप करता तो शायद गुंजन की जान बचाई जा सकती थी।

पहले से मिली चेतावनी

जांच में सामने आया है कि आकाश का व्यवहार पहले से संदिग्ध था और वह गुंजन को लगातार परेशान कर रहा था। गुंजन के भाई अंश ने बताया कि आकाश की पत्नी ने भी फोन करके चेतावनी दी थी कि वह धारदार हथियार लेकर घूम रहा है और किसी भी समय हमला कर सकता है। हालांकि, पूर्व में दी गई उसकी धमकियों को परिवार ने उतनी गंभीरता से नहीं लिया था। इस लापरवाही की कीमत अब पूरे परिवार को चुकानी पड़ रही है।

परिवार पर टूटा पहाड़

गुंजन की मां सदमे में हैं और बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। पायल उनके साथ रहकर हर संभव सहारा देने की कोशिश कर रही है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ है, लेकिन घर का माहौल गहरे शोक में डूबा हुआ है। परिवार न्याय की उम्मीद में पुलिस कार्रवाई पर नजर रखे हुए है।

पुलिस की कार्रवाई और सवाल

पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी की तलाश जारी है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। वहीं, यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने लोगों की मौजूदगी में हुई इस वारदात को क्यों रोका नहीं गया। स्थानीय नागरिक संगठनों ने भी सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी पर चर्चा शुरू कर दी है।

शहर में गूंजती चिंता

यह घटना देहरादून जैसे अपेक्षाकृत शांत शहर के लिए एक बड़ा झटका है। लोग अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। महिला सुरक्षा, सार्वजनिक जिम्मेदारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे मुद्दे फिर से बहस के केंद्र में आ गए हैं। गुंजन की मौत ने सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे समाज को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है।

आगे की राह

जांच पूरी होने तक कई सवाल अनुत्तरित रहेंगे, लेकिन इतना तय है कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी है। अगर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है तो लोगों को सिर्फ दर्शक नहीं, जिम्मेदार नागरिक बनना होगा।

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