DefenseDeal – 2.38 लाख करोड़ के हथियार सौदे को मिली मंजूरी
DefenseDeal – भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने 2.38 लाख करोड़ रुपये के हथियार और सैन्य उपकरणों की खरीद को मंजूरी दे दी है। यह फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में लिया गया। इस फैसले के बाद भारतीय सेना और वायुसेना की ताकत में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, खासकर आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए।

एस-400 और परिवहन विमानों पर खास जोर
मंजूरी में अत्याधुनिक एस-400 वायु रक्षा प्रणाली और सैन्य परिवहन विमानों की खरीद शामिल है। आधिकारिक बयान में संख्या स्पष्ट नहीं की गई, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार पांच एस-400 यूनिट और करीब 60 परिवहन विमान इस योजना का हिस्सा हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ विमान सीधे खरीदे जाएंगे, जबकि बाकी का निर्माण भारत में किया जाएगा, जिससे घरेलू रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
एस-400 प्रणाली को लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों को निष्क्रिय करने के लिए दुनिया की सबसे प्रभावी प्रणालियों में गिना जाता है। इसके शामिल होने से देश की हवाई सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।
वायुसेना की क्षमताओं में होगा विस्तार
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मध्यम क्षमता वाले परिवहन विमानों की खरीद से वायुसेना की लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल क्षमता में सुधार आएगा। ये नए विमान पुराने एएन-32 और आईएल-76 विमानों की जगह लेंगे, जिससे तेज और सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे सैन्य अभियानों के दौरान संसाधनों और सैनिकों की आवाजाही अधिक प्रभावी हो सकेगी।
इसके अलावा, एसयू-30 लड़ाकू विमानों के इंजन की मरम्मत और अपग्रेड का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया है, जिससे इन विमानों की सेवा अवधि बढ़ेगी और उनकी कार्यक्षमता बेहतर होगी।
ड्रोन और निगरानी सिस्टम पर भी फोकस
आधुनिक युद्ध में ड्रोन और निगरानी प्रणालियों की भूमिका को देखते हुए, सरकार ने इन क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ाने का फैसला किया है। ड्रोन का उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर सटीक कार्रवाई करने के लिए किया जाएगा। इससे सैन्य अभियानों की योजना और क्रियान्वयन दोनों में सुधार आएगा।
साथ ही, सेना के लिए उन्नत वायु रक्षा निगरानी प्रणाली, उच्च क्षमता वाले संचार उपकरण और आधुनिक तोप प्रणाली को भी मंजूरी दी गई है। इन सभी कदमों का उद्देश्य सेना को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है।
रणनीतिक दृष्टि से अहम फैसला
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निवेश से भारत न केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा बेहतर कर पाएगा, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में भी सक्षम होगा।
एस-400 प्रणाली को लेकर पहले भी भारत ने रूस के साथ समझौता किया था, जिसके तहत कुछ यूनिट पहले ही मिल चुकी हैं। नई मंजूरी को उसी दिशा में आगे बढ़ने के रूप में देखा जा रहा है।
आत्मनिर्भरता को भी मिलेगा बढ़ावा
इस खरीद में घरेलू निर्माण पर भी जोर दिया गया है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने से न केवल लागत कम होगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और तकनीकी क्षमता में सुधार होगा।
सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों को लेकर दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है और भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर रहा है।



