Cyber Investment Fraud Syndicate: दिल्ली पुलिस ने उखाड़ी उस गिरोह की जड़ें जो मोबाइल स्क्रीन से लूट रहा था देश…
Cyber Investment Fraud Syndicate: डिजिटल इंडिया के दौर में जहां निवेश के नए रास्ते खुले हैं, वहीं साइबर अपराधियों ने इसे ठगी का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे ही अखिल भारतीय (Pan-India Cyber Crime) सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है जो मासूम लोगों को रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाकर उनके जीवन भर की कमाई डकार रहा था। इस मामले में पुलिस ने तीन और मास्टरमाइंड को दबोचा है, जिसके बाद गिरफ्तार होने वाले आरोपियों की संख्या सात तक पहुंच गई है। यह कार्रवाई बताती है कि आपकी मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाला हर मुनाफे का ग्राफ सच नहीं होता।

मुंबई से फरीदाबाद तक फैला मकड़जाल और नई गिरफ्तारियां
क्राइम ब्रांच की टीम ने इस सिंडिकेट के तार जोड़ने के लिए कई राज्यों में छापेमारी की। पुलिस के मुताबिक, ताज़ा कार्रवाई में मुंबई के आरिफ सैयद और मोहम्मद रहान अनूमी के साथ फरीदाबाद के सुमर सैनी को गिरफ्तार किया गया है। यह (Law Enforcement Action) इस बात का सबूत है कि साइबर अपराधी चाहे कितनी भी परतों के पीछे छिप जाएं, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं। जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद पेशेवर तरीके से काम कर रहा था और इनके पास हर काम के लिए अलग-अलग टीमें थीं।
नकली ऐप और जाली आईपीओ का वो मायाजाल जिसमें फंसे 27 लाख
ठगी का तरीका इतना शातिर था कि कोई भी पढ़ा-लिखा व्यक्ति झांसे में आ जाए। सोशल मीडिया पर फर्जी ट्रेडिंग ग्रुप बनाए गए और फिर एक नकली मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करवाई गई। इस (Fake Trading Application) के जरिए पीड़ित को काल्पनिक आईपीओ और ऐसी ट्रेडिंग स्कीम दिखाई गईं जो हकीकत में मौजूद ही नहीं थीं। एक पीड़ित ने तो भारी मुनाफे के चक्कर में 27.20 लाख रुपये गंवा दिए। जब तक उसे अहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है, तब तक डिजिटल लुटेरे अपना काम कर चुके थे।
म्यूल बैंक अकाउंट्स: ठगी की रकम को गायब करने का ‘डिजिटल रूट’
अपराधियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती लूटी गई रकम को ठिकाने लगाना होता है, और इसके लिए उन्होंने ‘म्यूल अकाउंट्स’ का सहारा लिया। जांच में खुलासा हुआ कि पीड़ित के 14 लाख रुपये ‘नेक्सस-इन ब्रॉडबैंड’ नामक एक करंट अकाउंट में भेजे गए थे। इन (Financial Crime Investigation) की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने पाया कि मुंबई का आरिफ सैयद इन खातों को खुलवाने और संचालित करने का मुख्य सूत्रधार था। ये खाते आम लोगों के नाम पर होते थे, लेकिन इनका कंट्रोल और क्रेडेंशियल पूरी तरह ठगों के हाथ में रहता था।
फरीदाबाद का ग्रेजुएट और मुंबई के मैनेजर: एक संगठित अपराध की कहानी
गिरफ्तार किया गया सुमर सैनी कोई अनपढ़ अपराधी नहीं, बल्कि एक ग्रेजुएट है जिसने चंद रुपयों के लालच में अपना खाता ठगों को सौंप दिया। उसके खाते में 4 लाख रुपये का अवैध ट्रांजैक्शन पाया गया। वहीं, 8 जनवरी को मुंबई से पकड़ा गया मोहम्मद रहान अनूमी खातों के प्रबंधन का काम देख रहा था। यह (Organized Cyber Syndicate) इतना व्यवस्थित था कि इसमें सिम कार्ड मैनेज करने वालों से लेकर क्यूआर कोड जनरेट करने वालों तक की भूमिका पहले से तय थी। यह आधुनिक युग की एक ऐसी संगठित डकैती है जिसे बिना किसी हथियार के अंजाम दिया जा रहा था।
सोशल मीडिया पर ‘निवेश सलाहकार’ बनकर घूम रहे हैं शिकारी
पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि यह गिरोह सोशल मीडिया पर खुद को बड़े निवेश सलाहकार के रूप में पेश करता था। वे टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर ऐसे ग्रुप बनाते थे जहां फर्जी स्क्रीनशॉट के जरिए मुनाफे का दावा किया जाता था। इस (Digital Identity Theft) और धोखाधड़ी के खेल में सिम कार्ड्स का इस्तेमाल भी बेहद चालाकी से किया गया ताकि पुलिस उन तक न पहुंच सके। यह मामला उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो सोशल मीडिया पर मिलने वाली अनजान ‘टिप्स’ के आधार पर अपना पैसा दांव पर लगा देते हैं।
क्राइम ब्रांच की मुस्तैदी और आगे की बड़ी कार्रवाई
शुरुआती दौर में मयूर मरुति सानस, गौरव जाधव और अन्य की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने हार नहीं मानी और इस सिंडिकेट की गहराई तक जाने का फैसला किया। पुलिस की इस (Cyber Security Strategy) ने अब पूरे नेटवर्क को हिलाकर रख दिया है। जांच अधिकारी अब उन ‘व्हाइट कॉलर’ अपराधियों की तलाश कर रहे हैं जो पर्दे के पीछे से इन लड़कों को निर्देश दे रहे थे। पुलिस को अंदेशा है कि इस सिंडिकेट ने देश भर में सैकड़ों लोगों को करोड़ों का चूना लगाया होगा, जिसकी फाइलें अब एक-एक कर खुल रही हैं।
कैसे बचें डिजिटल लुटेरों से: विशेषज्ञों की राय
इस भंडाफोड़ के बाद दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत ऐप पर निवेश न करें। निवेश के लिए हमेशा सेबी (SEBI) द्वारा मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म का ही चुनाव करें। किसी भी (Online Investment Safety) प्रोटोकॉल का उल्लंघन आपको भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है। अगर कोई आपको असामान्य रूप से ज्यादा रिटर्न का वादा करता है, तो समझ लीजिए कि वह निवेश का अवसर नहीं, बल्कि ठगी का जाल है। आपकी सतर्कता ही इन साइबर ठगों का सबसे बड़ा इलाज है।



