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CreamyLayer – विवाहित OBC महिला की आय निर्धारण पर सुनवाई का मिला जवाब

CreamyLayer – सरकारी नौकरियों में आरक्षण के तहत ‘क्रीमी लेयर’ तय करने के मानदंड पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम कानूनी सवाल पर सुनवाई के लिए हामी भर दी है। मुद्दा यह है कि किसी विवाहित ओबीसी महिला उम्मीदवार की पात्रता तय करते समय उसकी आय का आधार किसे माना जाए—पति की आय को या माता-पिता की आय को। यह मामला कर्नाटक से जुड़ा है और इसका असर भविष्य में कई समान मामलों पर पड़ सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिका कर्नाटक की एक महिला से जुड़ी है, जिसने सिविल जज के पद के लिए आवेदन किया था। वह हिंदू नामधारी समुदाय से संबंध रखती हैं, जिसे राज्य में II-A श्रेणी के अंतर्गत आरक्षण प्राप्त है। वर्ष 2018 में उनकी शादी हो चुकी है। उनके पति III-B श्रेणी से आते हैं। विवाह के बाद वह अपने माता-पिता से अलग रह रही हैं।

इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 57 पदों में से 6 पद II-A श्रेणी के लिए आरक्षित थे। चयन के बाद उन्होंने अपने पति की आय के आधार पर जाति प्रमाणपत्र के सत्यापन और संबंधित प्रमाणपत्र जारी करने का अनुरोध किया।

विवाद कैसे उत्पन्न हुआ

जिला स्तरीय जाति और आय सत्यापन समिति ने उनका आवेदन यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि वह अपने माता-पिता की आय के आधार पर ‘क्रीमी लेयर’ में आती हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, उनकी माता कर्नाटक न्यायिक सेवा से जिला न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं और पिता सहायक वन संरक्षक रहे हैं। समिति का मत था कि माता-पिता की आय और पेंशन को ध्यान में रखते हुए वह आरक्षण की पात्रता से बाहर हो जाती हैं।

हाई कोर्ट में क्या हुआ

महिला ने कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी कि विवाह के बाद उनकी आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन पति की आय के आधार पर किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि पति की वार्षिक आय उन्हें क्रीमी लेयर की सीमा से बाहर रखती है।

राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि माता-पिता की पेंशन और आय को परिवार की कुल आय का हिस्सा माना जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की दलील स्वीकार करते हुए महिला की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि माता-पिता की पेंशन को भी आय में शामिल किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में उठे कानूनी प्रश्न

हाई कोर्ट के निर्णय के बाद महिला ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ने पीठ के समक्ष दो प्रमुख प्रश्न रखे—पहला, क्या विवाहित महिला उम्मीदवार के लिए क्रीमी लेयर निर्धारण में पति की आय को प्राथमिक आधार बनाया जाना चाहिए? दूसरा, यदि माता-पिता की आय को माना जाए, तो क्या उनकी पेंशन को आय की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए?

पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल थे।

अदालत की प्रारंभिक कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद अपीलकर्ता को एक सप्ताह में प्रत्युत्तर देने की अनुमति दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आरक्षण नीति के व्यावहारिक पहलुओं को स्पष्ट कर सकता है, खासकर उन स्थितियों में जहां विवाह के बाद महिला की पारिवारिक और आर्थिक स्थिति बदल जाती है। अंतिम निर्णय आने तक इस मुद्दे पर कानूनी बहस जारी रहेगी।

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