BRICS – दूसरे दिन विदेश मंत्रियों की बैठकों पर टिकी है दुनिया की नजर
BRICS – ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन कूटनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों और विदेश मंत्रियों के साथ कई अहम द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम तय किया। सम्मेलन के दौरान वैश्विक सहयोग, आर्थिक साझेदारी और बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर व्यापक चर्चा हो रही है। भारत इस आयोजन के जरिए सदस्य और साझेदार देशों के बीच संवाद को और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

दूसरे दिन के कार्यक्रम में मलेशिया, क्यूबा, युगांडा और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग दौर की बातचीत शामिल रही। इसके अलावा सऊदी अरब, कजाकिस्तान, वियतनाम, उज्बेकिस्तान और बेलारूस के अधिकारियों के साथ भी बैठकें तय की गईं। इन बैठकों का उद्देश्य व्यापार, रणनीतिक सहयोग और बहुपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना माना जा रहा है।
उद्घाटन सत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सभी प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स ने पिछले दो दशकों में वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में संगठन की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
जयशंकर के अनुसार, ब्रिक्स केवल आर्थिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह विकासशील देशों की साझा आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व भी करता है। उन्होंने कहा कि साझेदार देशों की भागीदारी ने संगठन की सामूहिक क्षमता को और मजबूत किया है। उनका मानना है कि सहयोग के जरिए सदस्य देश वैश्विक चुनौतियों का अधिक प्रभावी तरीके से सामना कर सकते हैं।
भविष्य की रणनीति पर हुई चर्चा
विदेश मंत्री ने कहा कि सम्मेलन में संगठन के भविष्य और सहयोग की दिशा को लेकर भी चर्चा हो रही है। उन्होंने इस दौरान चार प्रमुख प्राथमिकताओं का उल्लेख किया, जिनमें मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता शामिल हैं। उनके मुताबिक यही क्षेत्र आने वाले समय में ब्रिक्स देशों की साझेदारी को नई दिशा देंगे।
उन्होंने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करना, बाजारों में विविधता लाना और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान निकालना सदस्य देशों की साझा प्राथमिकता है। साथ ही डिजिटल एकीकरण और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
नवाचार और स्टार्टअप सहयोग पर फोकस
जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, रिसर्च प्लेटफॉर्म और यूथ स्टार्टअप पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर तैयार कर रहे हैं।
इसके अलावा छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहलें की जा रही हैं। ब्रिक्स एमएसएमई कनेक्ट पोर्टल और व्यापार सहयोग से जुड़े कार्यक्रमों को सदस्य देशों के बीच आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जलवायु और टिकाऊ विकास पर भी चर्चा
सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने कहा कि सदस्य देश टिकाऊ विकास और हरित ऊर्जा को लेकर साझा रणनीति बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। उनका कहना था कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना आने वाले समय की बड़ी चुनौती होगी।
नई दिल्ली में आयोजित यह सम्मेलन वैश्विक कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच लगातार हो रही बातचीत से अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।