AviationSafety – पश्चिम एशिया तनाव के बीच उड़ानों पर उठी रोक की मांग
AviationSafety – पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब नागरिक उड्डयन क्षेत्र पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इसी पृष्ठभूमि में एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPA India) ने नागर विमानन मंत्रालय और विमानन नियामक डीजीसीए से विशेष हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि जिन क्षेत्रों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, वहां वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन तब तक रोका जाना चाहिए, जब तक केंद्र स्तर पर जोखिम का समुचित आकलन न हो जाए। पायलटों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए इस मुद्दे को तत्काल प्राथमिकता देने की अपील की गई है।

जोखिम वाले क्षेत्रों में उड़ानों पर रोक की अपील
एल्पा इंडिया ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि वर्तमान हालात में पश्चिम एशिया के कई हिस्से उच्च जोखिम वाले माने जा रहे हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में उड़ान संचालन जारी रखना सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। संगठन का मानना है कि किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए पहले व्यापक समीक्षा जरूरी है। इसके बाद ही आगे की रणनीति तय की जानी चाहिए, ताकि यात्रियों और चालक दल दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
युद्ध जोखिम बीमा को लेकर उठाई चिंता
संगठन ने केवल उड़ानों के संचालन पर ही नहीं, बल्कि चालक दल के बीमा कवरेज पर भी गंभीर चिंता जताई है। एल्पा इंडिया ने कहा है कि संघर्ष क्षेत्रों में उड़ान भरने वाले सभी क्रू सदस्यों के लिए युद्ध जोखिम बीमा अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बीमा पॉलिसी में युद्ध से जुड़े जोखिमों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया हो। संगठन ने बीमा की वैधता की जांच और पारदर्शिता पर भी जोर दिया है।
एयरलाइनों की क्षमता पर उठे सवाल
डीजीसीए को लिखे पत्र में यह भी कहा गया है कि वाणिज्यिक एयरलाइनों के पास ऐसे जटिल हालात का स्वतंत्र रूप से आकलन करने के लिए जरूरी संसाधन और खुफिया जानकारी नहीं होती। न तो उनके पास पर्याप्त निगरानी तंत्र होता है और न ही विस्तृत भू-राजनीतिक विश्लेषण की क्षमता। ऐसे में यह जिम्मेदारी नियामक संस्थाओं की बनती है कि वे स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें।
पहले से प्रभावित हो चुकी हैं कई उड़ानें
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने पहले ही अपनी सेवाएं सीमित कर दी हैं। कुछ उड़ानों के रूट बदले गए हैं, तो कुछ को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक स्तर पर भी एयरलाइंस इस स्थिति को लेकर सतर्क हैं और जोखिम को कम करने के उपाय कर रही हैं।
स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
एल्पा इंडिया ने सरकार और डीजीसीए से यह भी आग्रह किया है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्पष्ट और बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। संगठन का मानना है कि एक समान नीति होने से एयरलाइनों को निर्णय लेने में सुविधा होगी और सुरक्षा मानकों में एकरूपता बनी रहेगी। इससे अनिश्चितता की स्थिति भी कम होगी।
एयर इंडिया के निर्णयों की जांच की मांग
संगठन ने अपने पत्र में एयर इंडिया के संचालन से जुड़े कुछ निर्णयों की समीक्षा की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि यदि किसी उड़ान में पर्याप्त सुरक्षा उपाय या बीमा कवरेज नहीं था, तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी। इससे भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए बेहतर नीतियां बनाई जा सकेंगी।
पहले भी उठ चुकी है यह मांग
यह पहला अवसर नहीं है जब एल्पा इंडिया ने इस मुद्दे को उठाया हो। इससे पहले 18 मार्च को भी संगठन ने चालक दल और यात्रियों के लिए युद्ध जोखिम बीमा सुनिश्चित करने की मांग की थी। लगातार बदलते हालात को देखते हुए संगठन अब इस विषय पर और अधिक गंभीरता से कार्रवाई की अपेक्षा कर रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक विमानन क्षेत्र को सुरक्षा के नए मानकों के साथ खुद को ढालना होगा। ऐसे समय में पायलट संगठनों की ओर से उठाई गई चिंताएं नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।



