AssamPolitics – चुनावी माहौल में भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
AssamPolitics – असम में आगामी चुनावी सरगर्मियों से पहले सियासी तापमान तेजी से बढ़ गया है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी क्रम में प्रदेश से लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “असम का जिन्ना” करार दिया। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस और भी तेज हो गई है।

प्रेस वार्ता में तीखे आरोप
गुवाहाटी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान गौरव गोगोई ने भाजपा और मुख्यमंत्री पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राजनीतिक संवाद की भाषा लगातार आक्रामक होती जा रही है और सरकार विपक्ष की आलोचना को सहन करने के बजाय व्यक्तिगत हमलों का सहारा ले रही है। गोगोई का आरोप था कि राज्य की राजनीति को जानबूझकर ध्रुवीकरण की दिशा में ले जाया जा रहा है।
हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक इस बयान पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के आरोप निराधार हैं और जनता विकास कार्यों के आधार पर फैसला करेगी।
भूपेन बोरा के इस्तीफे पर टिप्पणी
कांग्रेस सांसद ने पूर्व असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पार्टी में बदलाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और संगठन को मजबूत करने के लिए समय-समय पर फैसले लिए जाते हैं। गोगोई ने यह भी स्पष्ट किया कि जो नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं, वे कांग्रेस के लिए अब कोई महत्व नहीं रखते। उनके अनुसार, पार्टी अपने सिद्धांतों और नीतियों के आधार पर आगे बढ़ रही है।
भाजपा-कांग्रेस के बीच बढ़ती तल्खी
असम की राजनीति में पिछले कुछ समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी का स्तर लगातार बढ़ा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अक्सर विपक्ष पर तीखे हमले करते रहे हैं, वहीं कांग्रेस भी राज्य सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाती रही है। विकास, कानून-व्यवस्था, पहचान और क्षेत्रीय मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव नजदीक आने के साथ इस तरह के बयान और तेज हो सकते हैं। दोनों दल अपने-अपने समर्थक आधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माने जा रहे हैं।
आगे क्या संकेत
राज्य की राजनीति में चल रही यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तीखी हो सकती है। फिलहाल दोनों दल अपने-अपने पक्ष को जनता के सामने रखने में जुटे हैं। चुनावी माहौल में इस तरह के बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में होगा।
असम की सियासत में जारी यह टकराव स्पष्ट संकेत देता है कि आगामी चुनाव मुकाबले को और दिलचस्प बना सकते हैं।



