Ashok Gajanan Modak: बुझ गया महाराष्ट्र की राजनीति का चमकता हुआ सितारा, अशोक गजानन मोडक के निधन से दौड़ गई शोक की लहर
Ashok Gajanan Modak: महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी सादगी और सिद्धांतों के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व विधान परिषद सदस्य (MLC) अशोक गजानन मोडक अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर से न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। 85 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा, जिससे (political fraternity) में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना आने वाले समय में बेहद कठिन होगा।

अस्पताल में ली अंतिम सांस और परिवार का दुख
अशोक गजानन मोडक (Ashok Gajanan Modak) पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे थे, जिसके कारण उन्हें मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके पुत्र आशीष मोडक ने अत्यंत भारी मन से जानकारी साझा की कि उनके पिता का निधन (Friday night) को पवई स्थित अस्पताल में हुआ। अपने अंतिम समय में वह अपने परिवार और शुभचिंतकों के बीच थे, जो उनके स्वस्थ होने की लगातार कामना कर रहे थे।
सादगी और सेवा से भरा रहा पूरा जीवन
अशोक मोडक ने अपना पूरा जीवन जनसेवा और समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया था। उनके निधन के समय उनका परिवार, जिसमें उनकी धर्मपत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री शामिल हैं, उनके साथ मौजूद थे। उनकी (personal integrity) और लोगों के प्रति उनके दयालु स्वभाव ने उन्हें हर वर्ग का प्रिय नेता बनाया था। वह राजनीति में केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि आम आदमी की आवाज बनने के लिए जाने जाते थे।
विधान परिषद में निभाई महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका
एमएलसी के रूप में अशोक मोडक का कार्यकाल बेहद प्रभावशाली रहा, जहां उन्होंने जनता से जुड़े मुद्दों को पूरी प्रखरता के साथ सदन में उठाया। उन्होंने हमेशा विकास और शिक्षा के क्षेत्र में (legislative contribution) को प्राथमिकता दी, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी न्याय मिल सके। उनके तर्कों और सुझावों का सम्मान विपक्षी दल के नेता भी पूरी शिद्दत के साथ करते थे।
महाराष्ट्र की राजनीति में छोड़ी एक अमिट छाप
एक अनुभवी राजनेता के तौर पर अशोक गजानन मोडक ने कई महत्वपूर्ण दौर देखे और उनमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। उनका जाना महाराष्ट्र के लिए एक (cultural loss) के समान है, क्योंकि वे उन चुनिंदा नेताओं में से थे जो राजनीति को समाज सुधार का एक माध्यम मानते थे। उनके मार्गदर्शन में कई युवा नेताओं ने राजनीति के गुर सीखे और आज वे राज्य की सेवा कर रहे हैं।
अंतिम विदाई और समर्थकों का उमड़ा सैलाब
उनके निधन की खबर फैलते ही पवई के अस्पताल और उनके आवास पर प्रशंसकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगने लगा। हर कोई अपने इस (visionary leader) के अंतिम दर्शन करने के लिए व्याकुल नजर आया। उनके बेटे आशीष ने बताया कि उनके पिता की विरासत उनके आदर्शों में जीवित रहेगी, जो उन्होंने अपने जीवन के 85 वर्षों के दौरान बड़ी मेहनत से संजोए थे।
सांत्वना और श्रद्धांजलि का दौर जारी
राज्य के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं ने अशोक मोडक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने एक स्वर में कहा कि (public service) के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी कमी प्रदेश की राजनीति में हमेशा खलती रहेगी, लेकिन उनके द्वारा दिखाए गए सत्य और सेवा के मार्ग पर चलकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।



