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Anant Singh:अनंत सिंह को मिल सकती है अंतरिम जमानत, जेल से बाहर आकर ले सकते हैं विधायक पद की शपथ

Anant Singh:मोकामा के बाहुबली नेता और जदयू विधायक अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में बेउर जेल में बंद अनंत सिंह ने पटना हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। याचिका में तर्क दिया गया है कि नवनिर्वाचित विधायक होने के नाते उन्हें 1 से 5 दिसंबर के बीच विधानसभा में शपथ लेनी जरूरी है, इसलिए कम से कम इस अवधि के लिए उन्हें जमानत दी जाए। सूत्रों का कहना है कि कोर्ट इस याचिका पर जल्द सुनवाई कर सकता है और अंतरिम राहत मिलने की पूरी संभावना है।

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चुनाव के ठीक बाद हुई थी अनंत सिंह की गिरफ्तारी

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान पटना के टाल क्षेत्र में जनसुराज अभियान से जुड़े कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। परिजनों ने सीधे तौर पर अनंत सिंह पर हत्या का आरोप लगाया और उनके खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने 1 नवंबर को देर रात अनंत सिंह के पैतृक आवास पर छापेमारी की और उन्हें गिरफ्तार कर बेउर जेल भेज दिया। उस समय चुनाव प्रचार अपने चरम पर था और अनंत सिंह मोकामा सीट से जदयू के अधिकृत उम्मीदवार थे।

जेल की सलाखों के पीछे से दर्ज की ऐतिहासिक जीत

गिरफ्तारी के बावजूद अनंत सिंह का राजनीतिक कद कम नहीं हुआ। उनके समर्थकों ने “छोटे सरकार जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए पूरे क्षेत्र में जोरदार प्रचार किया। नतीजा यह रहा कि जेल में बंद रहते हुए भी अनंत सिंह ने मोकामा सीट पर भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने राजद समर्थित प्रत्याशी और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी नीना देवी को करारी शिकस्त दी। यह जीत बिहार की राजनीति में एक मिसाल बन गई कि क्षेत्रीय प्रभाव और जनसमर्थन किस तरह कानूनी पाबंदियों को भी धता बता सकता है।

शपथ ग्रहण के लिए अंतरिम जमानत की मजबूत दलील

अनंत सिंह के अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा है कि संविधान के अनुसार नवनिर्वाचित विधायक को तय समयसीमा के अंदर शपथ लेना अनिवार्य है। अगर वे शपथ नहीं ले पाए तो उनकी सदस्यता स्वतः रद्द हो सकती है। इसलिए कम से कम शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उन्हें विधानसभा आने-जाने की छूट मिलनी चाहिए। जानकारों का मानना है कि कोर्ट इस संवैधानिक बिंदु को गंभीरता से लेगा और कुछ शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दे सकता है। इन शर्तों में पुलिस सुरक्षा में विधानसभा आना-जाना, कोई जनसंपर्क न करना और तय समय के बाद वापस जेल लौटना शामिल हो सकता है।

मोकामा की सियासत में फिर छाने वाले हैं छोटे सरकार

अनंत सिंह का मोकामा और आसपास के इलाकों में जबरदस्त प्रभाव है। जेल से बाहर आने के बाद भले ही कुछ घंटों या कुछ दिनों के लिए ही क्यों न हो, उनके समर्थक उत्साह से भर जाएंगे। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि छोटे सरकार जैसे ही जेल गेट से बाहर कदम रखेंगे, पूरा मोकामा उनके स्वागत में सड़कों पर उतर आएगा। राजनीतिक गलियारों में भी यह माना जा रहा है कि उनकी वापसी से मोकामा की सियासत में नया रंग भर जाएगा।

अनंत सिंह का राजनीतिक सफर हमेशा से विवादों और जीत का दूसरा नाम रहा है। जेल से चुनाव लड़ना और जीतना कोई पहली बार नहीं हुआ है, लेकिन हर बार वे सुर्खियों में छाए रहते हैं। अब सभी की निगाहें पटना हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं। अगर कोर्ट ने हरी झंडी दिखाई तो बहुत जल्द मोकामा के छोटे सरकार अपने प्रशंसकों के बीच नजर आएंगे और विधानसभा की सदस्यता की शपथ लेकर फिर से सक्रिय राजनीति में वापसी करेंगे।

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