AIImpactSummit – भारत मंडपम में एआई तकनीक ने खींचा सबका ध्यान
AIImpactSummit – नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान एक ऐसी तकनीकी पहल देखने को मिली जिसने कार्यक्रम की दिशा ही बदल दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब मंच से अपना संबोधन दे रहे थे, उसी समय उनके शब्दों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से तुरंत सांकेतिक भाषा में परिवर्तित किया जा रहा था। यह प्रस्तुति पीछे लगी बड़ी स्क्रीन पर एनिमेशन के माध्यम से दिखाई गई, जिससे श्रवण बाधित समुदाय भी भाषण को उसी समय समझ सका। कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने इसे तकनीक और समावेशन के संगम का उदाहरण बताया।

रियल टाइम साइन लैंग्वेज फीचर बना चर्चा का केंद्र
समिट के दौरान जिस एआई आधारित फीचर ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया, वह था भाषण का लाइव साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन। जैसे ही प्रधानमंत्री बोलते, स्क्रीन पर उनका संदेश सांकेतिक संकेतों में दिखाई देने लगता। यह प्रक्रिया पूरी तरह रियल टाइम में संचालित हो रही थी। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की प्रणाली भविष्य में सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों को अधिक सुलभ बना सकती है। इससे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी संचार की नई संभावनाएं खुलती हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो अब तक मुख्यधारा के आयोजनों से आंशिक रूप से जुड़ पाते थे।
एआई पर प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मानव इतिहास में बदलाव लाने वाली शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में आज दो तरह की सोच मौजूद है—एक जो एआई को आशंका की नजर से देखती है और दूसरी जो इसमें संभावनाएं तलाशती है। उनके शब्दों में, भारत भय से नहीं बल्कि भविष्य की दृष्टि से एआई को अपनाना चाहता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक को अपनाने के साथ जिम्मेदारी का दायरा भी बढ़ता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मशीन लर्निंग से आगे बढ़ते हुए अब हम ऐसी मशीनों के दौर में प्रवेश कर रहे हैं जो स्वयं सीखने और निर्णय लेने की क्षमता रखती हैं। ऐसे समय में यह जरूरी है कि नीति और दृष्टि दोनों व्यापक हों। उन्होंने सवाल उठाया कि आने वाली पीढ़ियों को हम किस प्रकार की एआई व्यवस्था सौंपेंगे—ऐसी जो मानवता के हित में हो या केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित हो।
‘मानव’ विजन की रूपरेखा
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने एआई के लिए ‘मानव’ नामक दृष्टि पेश की। उन्होंने बताया कि यह शब्द केवल प्रतीक नहीं, बल्कि सिद्धांतों का संकलन है। एम का आशय नैतिक और एथिकल व्यवस्था से है, ए जवाबदेह शासन की ओर संकेत करता है, एन राष्ट्रीय संप्रभुता का प्रतिनिधित्व करता है, ए सुलभ और समावेशी ढांचे को दर्शाता है और वी वैधता व प्रामाणिकता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारत एआई को केवल तकनीकी प्रगति के रूप में नहीं देखता, बल्कि उसे सामाजिक न्याय और समान अवसर के साधन के रूप में अपनाना चाहता है। समिट की थीम ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यही भारत का मानक है।
समावेशी और लोकतांत्रिक एआई पर जोर
प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि एआई के विकास में इंसान को केवल डेटा का स्रोत न समझा जाए। तकनीक का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि उसे सीमित करना। उन्होंने एआई को लोकतांत्रिक बनाने की आवश्यकता बताई ताकि इसका लाभ वैश्विक दक्षिण सहित उन समाजों तक पहुंचे, जो अभी डिजिटल परिवर्तन के शुरुआती चरण में हैं।
समिट में प्रस्तुत तकनीकी प्रदर्शनों और चर्चाओं ने संकेत दिया कि भारत एआई के क्षेत्र में नीतिगत और तकनीकी दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। भारत मंडपम में दिखी यह पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



