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AgustaCase – सुप्रीम कोर्ट ने मिशेल को सौंपा याचिका की दूसरा पक्ष

AgustaCase – अगस्टावेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया संबंधी फैसला सुनाया। कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स द्वारा दायर रिहाई याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इसे दूसरी पीठ के पास भेजने का निर्देश दिया। कोर्ट का कहना था कि इस मामले से जुड़ी पूर्व याचिकाओं पर पहले ही एक विशेष पीठ सुनवाई कर चुकी है, इसलिए न्यायिक निरंतरता बनाए रखने के लिए मौजूदा याचिका भी उसी पीठ के समक्ष रखी जानी चाहिए।

पहले की सुनवाई का दिया गया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में पहले भी कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया जा चुका है। चूंकि पहले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने की थी, इसलिए नए आवेदन को भी उसी पीठ के सामने प्रस्तुत करना उचित रहेगा। अदालत ने कहा कि इससे मामले की समझ और निरंतरता बनी रहेगी, जो किसी भी जटिल कानूनी मामले में आवश्यक होती है।

प्रत्यर्पण संधि के प्रावधान पर सवाल

क्रिश्चियन मिशेल ने अपनी याचिका में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के एक प्रावधान को चुनौती दी है। उनका कहना है कि संधि के अनुसार किसी भी प्रत्यर्पित व्यक्ति पर केवल उन्हीं आरोपों में मुकदमा चलाया जा सकता है, जिनके आधार पर उसे वापस लाया गया हो। उन्होंने तर्क दिया कि उनके खिलाफ ऐसे मामलों में भी कार्रवाई की जा रही है, जो इस दायरे से बाहर हैं।

हिरासत को लेकर उठाया मुद्दा

याचिका में मिशेल ने यह भी कहा है कि उनकी हिरासत अब कानूनी सीमाओं से आगे बढ़ चुकी है। उनके अनुसार, उन्होंने दिसंबर 2025 तक जेल में सात साल पूरे कर लिए हैं, ऐसे में उनकी आगे की कैद को वैध नहीं माना जा सकता। उन्होंने अदालत से इस आधार पर राहत की मांग की है। हालांकि, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय संबंधित पीठ द्वारा ही लिया जाएगा।

हाई कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है याचिका

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट मिशेल की याचिका पर सुनवाई कर चुका है और उसे खारिज कर चुका है। हाई कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब शीर्ष अदालत ने मामले को संबंधित पीठ के पास भेजकर आगे की सुनवाई का रास्ता साफ किया है।

प्रत्यर्पण और जमानत की स्थिति

क्रिश्चियन मिशेल को दिसंबर 2018 में दुबई से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। उन पर केंद्रीय जांच एजेंसी और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अलग-अलग मामलों में जांच चल रही है। उन्हें दोनों एजेंसियों से जुड़े मामलों में जमानत मिल चुकी है, लेकिन निर्धारित शर्तों को पूरा न कर पाने के कारण वह अब भी जेल में हैं। यह पहलू भी मामले को जटिल बनाता है, क्योंकि जमानत मिलने के बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो सकी है।

आगे की सुनवाई पर नजर

अब इस मामले में अगला कदम संबंधित पीठ द्वारा तय किया जाएगा, जो पहले से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगी। यह मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है और इसमें कई कानूनी पेचिदगियां जुड़ी हुई हैं। ऐसे में आने वाली सुनवाई पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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