UPSCNewRules – सिविल सेवा में दोबारा कोशिश पर आयोग ने तय किए सख्त दिशा-निर्देश
UPSCNewRules – सिविल सेवा परीक्षा में चयन होना वर्षों की मेहनत का नतीजा होता है, लेकिन लंबे समय तक यह देखा गया कि कई अभ्यर्थी मनचाही रैंक या पसंदीदा सेवा न मिलने पर दोबारा प्रयास करने का रास्ता चुनते रहे हैं। खासकर IPS या अन्य Central Group ‘A’ सेवाओं में चयन के बाद IAS या बेहतर रैंक के लिए फिर से परीक्षा देने की प्रवृत्ति आम रही है। अब UPSC New Rules 2026 के लागू होने के बाद यह रास्ता पहले जितना सरल नहीं रहा। आयोग ने नियमों को न सिर्फ स्पष्ट किया है, बल्कि उनमें सख्ती भी बढ़ाई है, जिससे एक गलत फैसला सीधे नौकरी गंवाने का कारण बन सकता है।

IPS और Group ‘A’ सेवाओं के लिए क्या बदला
नए नियमों के तहत यदि कोई उम्मीदवार CSE 2026 के जरिए IPS या किसी अन्य Central Group ‘A’ सेवा में चयनित होता है, तो उसे CSE 2027 में बैठने का अवसर तो मिलेगा, लेकिन कड़ी शर्तों के साथ। उम्मीदवार को अपनी सर्विस ट्रेनिंग से एक बार की आधिकारिक छूट लेनी होगी। यह छूट केवल CSE 2027 देने के उद्देश्य से मान्य होगी। बिना अनुमति परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इसके साथ ही एक और अहम शर्त जोड़ी गई है। ऐसे उम्मीदवारों को फाउंडेशन कोर्स जॉइन करना अनिवार्य होगा। यानी पूरी ट्रेनिंग टालने की अनुमति नहीं है, बल्कि शुरुआती फाउंडेशन कोर्स में शामिल होना जरूरी होगा। शेष ट्रेनिंग बाद में पूरी की जाएगी। यदि कोई उम्मीदवार न तो ट्रेनिंग जॉइन करता है और न ही छूट के लिए आवेदन करता है, तो उसकी CSE 2026 के तहत मिली नौकरी स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
CSE 2027 में दोबारा चयन की स्थिति
अगर कोई उम्मीदवार निर्धारित प्रक्रिया के तहत छूट लेकर CSE 2027 देता है और फिर से चयनित हो जाता है, तो उसे एक स्पष्ट निर्णय लेना होगा। ऐसे अभ्यर्थी को CSE 2026 या CSE 2027 में मिली पोस्ट में से केवल एक को चुनना होगा। जो सेवा नहीं चुनी जाएगी, वह स्वतः रद्द हो जाएगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक साथ दो सेवाओं को बनाए रखने का कोई विकल्प नहीं होगा।
सबसे गंभीर स्थिति तब बनेगी, जब उम्मीदवार न तो 2026 की ट्रेनिंग जॉइन करे और न ही 2027 की प्रक्रिया को पूरा करे। ऐसी स्थिति में दोनों ही चयन रद्द कर दिए जाएंगे। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि आयोग अब असमंजस की स्थिति को स्वीकार नहीं करेगा।
जॉइनिंग के बाद आगे की परीक्षाओं पर रोक
नए नियमों का एक अहम पहलू यह भी है कि अगर कोई उम्मीदवार अपनी आवंटित सेवा जॉइन कर लेता है, तो जब तक वह औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं देता, तब तक वह CSE 2028 या उसके बाद की किसी भी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकता। यानी नौकरी में रहते हुए एक और प्रयास का विकल्प अब बंद कर दिया गया है।
IAS और IFS के मामलों में और कड़ाई
IAS और IFS के लिए नियम और भी सख्त बनाए गए हैं। यदि कोई उम्मीदवार पहले से IAS या IFS में चयनित है और सेवा में कार्यरत है, तो वह CSE 2026 की परीक्षा देने के लिए पात्र नहीं होगा। इसके अलावा, यदि कोई अभ्यर्थी CSE 2026 का प्रारंभिक चरण पास कर लेता है और उसी दौरान किसी पिछली परीक्षा के आधार पर IAS या IFS में चयनित हो जाता है, तो उसे CSE 2026 के मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। ऐसे उम्मीदवार को अपनी मौजूदा IAS या IFS सेवा को ही स्वीकार करना होगा।
अभ्यर्थियों के लिए क्या संदेश है
इन बदलावों का सीधा अर्थ है कि अब सिविल सेवा परीक्षा केवल मेहनत का खेल नहीं रही, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। पहले जहां कम रैंक आने पर दोबारा प्रयास करना अपेक्षाकृत आसान फैसला लगता था, अब वही फैसला करियर को जोखिम में डाल सकता है।
सिविल सेवा को लेकर आयोग का स्पष्ट रुख
UPSC के नए नियम यह स्पष्ट करते हैं कि सिविल सेवाओं को अब स्टेपिंग स्टोन की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। आयोग चाहता है कि उम्मीदवार चयन के बाद जिम्मेदारी के साथ निर्णय लें और सेवाओं के प्रति गंभीर रहें। हर अभ्यर्थी को अब यह तय करना होगा कि वह जोखिम उठाना चाहता है या मिली हुई सेवा को पूरी प्रतिबद्धता के साथ स्वीकार करना चाहता है।



