TraditionalRecipe – घर पर बनाएं पौष्टिक पहाड़ी शैय्या मीठा व्यंजन
TraditionalRecipe – मीठा खाने के शौकीन लोगों के लिए हर क्षेत्र की अपनी खास पहचान होती है। पहाड़ी इलाकों में बनने वाली पारंपरिक मिठाइयों में एक नाम शैय्या का भी है, जो स्वाद और पोषण दोनों का संतुलन मानी जाती है। सादे लेकिन शुद्ध देसी सामग्री से तैयार होने वाली यह डिश घर में आसानी से बनाई जा सकती है। खास बात यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाले तत्व शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ मौसम के अनुकूल भी माने जाते हैं।

पारंपरिक स्वाद से जुड़ी खासियत
पहाड़ी शैय्या किसी बड़े तामझाम की मांग नहीं करती। यह एक ऐसी घरेलू मिठाई है जिसे खास अवसरों के साथ-साथ सामान्य दिनों में भी तैयार किया जाता है। पहाड़ों में ठंड के मौसम में यह व्यंजन खास तौर पर पसंद किया जाता है क्योंकि इसमें देसी घी और गुड़ का उपयोग होता है, जो शरीर को गर्माहट देने में सहायक माने जाते हैं।
इस डिश की खास बात इसका सादा लेकिन गहरा स्वाद है। चावल के आटे की खुशबू, देसी घी की महक और गुड़ की प्राकृतिक मिठास मिलकर ऐसा स्वाद तैयार करती है जो लंबे समय तक याद रहता है। ऊपर से भुने हुए तिल इसका स्वाद और पौष्टिकता दोनों बढ़ा देते हैं।
आवश्यक सामग्री और तैयारी
इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। एक कप चावल का आटा, आधा कप शुद्ध देसी घी, आधा कप गुड़, दो बड़े चम्मच भुने हुए तिल और आवश्यकतानुसार पानी काफी है।
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में चावल का आटा लें और उसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए उसे अच्छी तरह गूंथ लें। ध्यान रहे कि आटा न ज्यादा सख्त हो और न ही बहुत ढीला। इसका टेक्सचर नरम और चिकना होना चाहिए, ताकि पकाते समय इसमें गुठलियां न बनें।
भूनने की प्रक्रिया में सावधानी
अब एक कड़ाही में देसी घी डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। जब घी पर्याप्त गरम हो जाए तो उसमें थोड़ा-थोड़ा करके गूंथा हुआ चावल का आटा डालें। इस चरण में धैर्य सबसे जरूरी है। आटे को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें, ताकि वह नीचे से जले नहीं।
कुछ देर बाद आटे से हल्की खुशबू आने लगेगी और उसका रंग भी बदलने लगेगा। जब आटा घी छोड़ने लगे और सुनहरा दिखाई दे, तो समझ लें कि वह अच्छी तरह भुन चुका है। यही वह समय है जब स्वाद की असली नींव तैयार होती है।
गुड़ और तिल से बढ़ेगा स्वाद
भुने हुए आटे में अब गुड़ मिलाया जाता है। बेहतर होगा कि गुड़ को पहले छोटे टुकड़ों में तोड़ लें, ताकि वह जल्दी पिघल सके। गुड़ डालने के बाद मिश्रण को लगातार चलाते रहें, जिससे वह समान रूप से घुलकर आटे में मिल जाए।
जब गुड़ पूरी तरह से पिघल जाए और मिश्रण एकसार हो जाए, तब इसमें भुने हुए तिल डालें। तिल डालने से न केवल स्वाद में हल्की कुरकुराहट आती है, बल्कि यह पोषण की दृष्टि से भी फायदेमंद माना जाता है। तिल में कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए उपयोगी होते हैं।
परोसने का तरीका और लाभ
शैय्या को आप गरमागरम ही परोस सकते हैं। ताजा बनी शैय्या की खुशबू पूरे घर में फैल जाती है और खाने की मेज पर एक अलग ही माहौल बना देती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोग इसे पसंद करते हैं।
यह व्यंजन स्वाद के साथ-साथ ऊर्जा का अच्छा स्रोत भी माना जाता है। गुड़ प्राकृतिक मिठास देता है और देसी घी शरीर को ताकत प्रदान करता है। वहीं चावल का आटा इसे हल्का और सुपाच्य बनाता है।
यदि आप घर पर किसी पारंपरिक और हेल्दी मिठाई की तलाश में हैं, तो पहाड़ी शैय्या एक अच्छा विकल्प हो सकता है। कम समय में बनने वाली यह डिश स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन पेश करती है।



