लाइफ स्टाइल

SupremeCourt – पश्चिम बंगाल सरकार को SIR पर कड़ी चेतावनी

SupremeCourt – सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार बार-बार अस्पष्ट और अप्रासंगिक कारणों के साथ न्यायालय का रुख कर रही है, जिससे मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अनावश्यक देरी हो रही है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि SIR की कार्यवाही में तेजी लाने के लिए शीर्ष अदालत ने झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों की तैनाती के निर्देश दिए थे।

मुख्य न्यायाधीश की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राज्य सरकार को आगाह करते हुए कहा कि अदालत में बेवजह की दलीलों के साथ आने से बचा जाए। उन्होंने कहा कि हर दिन नए बहाने पेश करना स्वीकार्य नहीं है और इस प्रवृत्ति पर विराम लगना चाहिए। अदालत ने यह भी याद दिलाया कि उसने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की थी, जबकि सामान्यतः यह कार्य चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से लगातार आपत्तियां उठाई जा रही हैं।

राज्य सरकार की ओर से उठाए गए सवाल

पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि प्रक्रिया के दौरान कुछ असामान्य परिस्थितियां सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारी उन न्यायिक अधिकारियों को यह बता रहे हैं कि मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में किन्हें स्वीकार किया जाना चाहिए। सिब्बल का तर्क था कि इससे न्यायालय के उस निर्देश की भावना प्रभावित होती है, जिसमें तौर-तरीके तय करने की जिम्मेदारी कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को दी गई थी।

पीठ ने दलीलों को किया स्पष्ट

मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इन दलीलों पर असहमति जताई। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका न्यायिक अधिकारियों की तैनाती और सुविधाओं के निर्धारण तक सीमित है। दावों की जांच और दस्तावेजों की वैधता पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक अधिकारी ही करेंगे। अदालत ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को बार-बार उठाना प्रक्रिया को बाधित करने जैसा है।

प्रशिक्षण और समन्वय पर टिप्पणी

न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यदि चुनाव आयोग के अधिकारी आवश्यक प्रशिक्षण नहीं देंगे तो यह जिम्मेदारी कौन निभाएगा। उन्होंने दोहराया कि अदालत का आदेश स्पष्ट है और SIR को तेज करने के उद्देश्य से ही न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य सरकार और चुनाव आयोग, दोनों की जिम्मेदारी है कि वे इन अधिकारियों के कामकाज के लिए अनुकूल माहौल सुनिश्चित करें।

मुख्य सचिव की उपस्थिति और आगे की प्रक्रिया

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने यह भी बताया कि राज्य की मुख्य सचिव अदालत में मौजूद हैं, क्योंकि उनके मतदान अधिकार को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इस पर पीठ ने निर्देश दिया कि मुख्य सचिव चुनाव आयोग और न्यायिक अधिकारियों के साथ मिलकर SIR को शीघ्र पूरा कराने में सहयोग करें।

अंत में राज्य सरकार की ओर से यह आग्रह किया गया कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद, जिन नामों को न्यायिक अधिकारी शामिल करने का निर्णय लें, उनके लिए पूरक सूची प्रकाशित की जाए। इस पर अदालत ने कहा कि पूरी प्रक्रिया पहले से जारी आदेशों के अनुरूप ही आगे बढ़ेगी और दस्तावेजों की जांच के मानक पहले ही निर्धारित किए जा चुके हैं।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.