SleepHealth – पूरी नींद के बाद भी थकान क्यों बनी रहती है
SleepHealth – नींद को अक्सर सिर्फ आराम का समय माना जाता है, लेकिन असल में यह शरीर की सबसे सक्रिय और जरूरी प्रक्रियाओं में से एक है। जब हम सोते हैं, तब शरीर ऊर्जा को संतुलित करता है, कोशिकाओं की मरम्मत होती है और दिमाग दिनभर की यादों व सूचनाओं को व्यवस्थित करता है। यही कारण है कि पर्याप्त और गहरी नींद शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी मानी जाती है। इसके बावजूद आज बड़ी संख्या में लोग आठ घंटे की नींद लेने के बाद भी खुद को तरोताजा महसूस नहीं कर पाते।

आठ घंटे सोने के बाद भी क्यों महसूस होती है थकान
तेज रफ्तार जीवनशैली में नींद की समस्या आम हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि कई लोग तय समय तक सोने के बावजूद सुबह उठते ही सुस्ती, भारीपन और थकान महसूस करते हैं। कैलिफोर्निया स्थित गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी के अनुसार, इसका एक प्रमुख कारण स्लीप फ्रैगमेंटेशन है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति रात में कई बार नींद से जागता है, लेकिन उसे इसका स्पष्ट अहसास नहीं होता। इससे नींद की अवधि तो पूरी लगती है, लेकिन उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है।
खराब नींद के साफ संकेत
कम गुणवत्ता वाली नींद के कुछ संकेत रोजमर्रा की जिंदगी में साफ दिखाई देते हैं। सुबह उठते ही थकावट महसूस होना, दिनभर दिमाग का भारी रहना, दोपहर के समय अचानक ऊर्जा की कमी और सामान्य रूप से काम करने के लिए बार-बार कैफीन की जरूरत पड़ना, ये सभी संकेत बताते हैं कि नींद गहरी और संतुलित नहीं है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर कार्यक्षमता और मानसिक संतुलन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
नींद को नुकसान पहुंचाने वाली रोज की आदतें
डॉ. सौरभ सेठी के मुताबिक, कुछ सामान्य आदतें नींद की गुणवत्ता को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं। देर रात कैफीन का सेवन, शराब पीना, भारी भोजन करना और बिस्तर पर मोबाइल या अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल करना इनमें प्रमुख हैं। तेज रोशनी और लगातार स्क्रॉलिंग दिमाग को सक्रिय बनाए रखती है, जिससे शरीर पूरी तरह रिलैक्स नहीं कर पाता और गहरी नींद बाधित होती है।
देर रात भोजन का सीधा असर
सोने से ठीक पहले भारी भोजन करने से पाचन तंत्र सक्रिय रहता है। इससे शरीर को आराम की स्थिति में जाने में समय लगता है और नींद बार-बार टूट सकती है। नतीजतन सुबह उठने पर व्यक्ति खुद को थका हुआ और सुस्त महसूस करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि रात का भोजन हल्का और समय पर होना बेहतर नींद के लिए जरूरी है।
बेहतर नींद के लिए क्या करें
डॉ. सौरभ सेठी बेहतर नींद के लिए कुछ जरूरी सुझाव देते हैं। उनके अनुसार, सोने से कम से कम आठ घंटे पहले कैफीन का सेवन बंद कर देना चाहिए। रात का खाना सोने से लगभग तीन घंटे पहले कर लेना बेहतर होता है। शराब का सेवन सीमित रखें और सोने का वातावरण शांत, ठंडा और अंधेरा बनाएं। ये छोटे बदलाव नींद की गुणवत्ता में बड़ा सुधार ला सकते हैं।
बिस्तर पर फोन से बनाएं दूरी
नींद की गुणवत्ता बिगाड़ने में मोबाइल फोन की भूमिका सबसे ज्यादा मानी जाती है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को प्रभावित करती है, जो नींद के लिए जरूरी होता है। यही वजह है कि बिस्तर पर फोन इस्तेमाल करने से नींद देर से आती है और बीच-बीच में टूटती रहती है।
कब जरूरी है डॉक्टर से सलाह लेना
अगर अच्छी दिनचर्या और सही आदतें अपनाने के बावजूद थकान बनी रहती है, तो इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। स्लीप एपनिया, रेस्टलेस लेग सिंड्रोम, लंबे समय का तनाव, कुछ दवाइयों का असर या आयरन की कमी जैसी स्थितियां भी नींद को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है, ताकि सही कारण का पता लगाकर समय पर उपचार किया जा सके।



