Sankashti Chaturthi 2026 Dates: संकटों का होगा नाश और बरसेगी गणपति की कृपा, यहाँ देखें पूरी तिथि और शुभ मुहूर्त…
Sankashti Chaturthi 2026 Dates: हिंदू धर्म की समृद्ध परंपराओं में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है, और उनकी आराधना के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत सर्वश्रेष्ठ फलदायी बताया गया है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आने वाला यह उपवास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि (Hindu Spiritual Practices) का एक अभिन्न हिस्सा है जो साधक के अंतर्मन को शुद्ध करता है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से व्रत रखने वाले भक्तों के जीवन से सभी प्रकार के अमंगल दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि के नए द्वार खुलते हैं। चाहे करियर की बाधाएं हों या विवाह में आ रही देरी, बप्पा की शरण में जाने से हर संकट का समाधान संभव है।

साल 2026 की शुरुआत और अंगारकी चतुर्थी का विशेष योग
नए साल 2026 के आगमन के साथ ही श्रद्धालुओं में आगामी व्रतों और त्योहारों की तिथियों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। वर्ष 2026 की पहली संकष्टी चतुर्थी 6 जनवरी को पड़ेगी, जो कि मंगलवार होने के कारण (Angarki Chaturthi Significance) के विशेष फलदायी संयोग के साथ आएगी। अंगारकी चतुर्थी को शास्त्रों में अत्यंत प्रभावशाली माना गया है, क्योंकि इस दिन व्रत रखने से पूरे वर्ष की चतुर्थियों का पुण्य एक साथ प्राप्त हो जाता है। यदि आप भी अपने बिगड़े कार्यों को बनाना चाहते हैं और मंगल दोष से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो साल की इस पहली चतुर्थी का व्रत आपके लिए वरदान साबित हो सकता है।
मनोकामना पूर्ति और बाधा निवारण का अचूक मार्ग
संकष्टी चतुर्थी का शाब्दिक अर्थ ही ‘संकटों को हरने वाली चतुर्थी’ है, जो व्यक्ति को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। करियर, व्यापार और नौकरी के क्षेत्र में निरंतर मिल रही असफलताओं को दूर करने के लिए भक्त (Vighnaharta Ganesha Worship) का सहारा लेते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो गणेश जी बुद्धि के देवता हैं, इसलिए इस व्रत के प्रभाव से साधक की निर्णय क्षमता और बौद्धिक कौशल में अद्भुत सुधार होता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ है जो अपने जीवन में नवीनता और स्थायित्व की तलाश कर रहे हैं।
संकष्टी चतुर्थी व्रत कैलेंडर 2026: तिथियों की विस्तृत सूची
वर्ष 2026 में पड़ने वाली सभी संकष्टी चतुर्थियों की सूची नीचे दी गई है, ताकि आप अपने धार्मिक अनुष्ठानों की योजना समय रहते बना सकें:
| तिथि | दिन | व्रत का नाम |
| 6 जनवरी 2026 | मंगलवार | अंगारकी चतुर्थी |
| 5 फरवरी 2026 | गुरुवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 6 मार्च 2026 | शुक्रवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 5 अप्रैल 2026 | रविवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 5 मई 2026 | मंगलवार | अंगारकी चतुर्थी |
| 3 जून 2026 | बुधवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 3 जुलाई 2026 | शुक्रवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 2 अगस्त 2026 | रविवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 31 अगस्त 2026 | सोमवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 29 सितंबर 2026 | मंगलवार | अंगारकी चतुर्थी |
| 29 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 27 नवंबर 2026 | शुक्रवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 26 दिसंबर 2026 | शनिवार | संकष्टी चतुर्थी |
(नोट: संकष्टी चतुर्थी की तिथियां स्थानीय चंद्रोदय के समय के अनुसार (Lunar Calendar Variations) के कारण आंशिक रूप से बदल सकती हैं।)
गणपति स्थापना और श्रृंगार की सरल विधि
संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। एक पवित्र चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा के दौरान प्रभु को (Ganesha Ritualistic Dressing) के अनुसार लाल या हरे रंग के सुंदर वस्त्र पहनाएं और उनका विधि-विधान से श्रृंगार करें। श्रृंगार के समय चंदन का तिलक लगाएं और गणेश जी के प्रिय सिंदूर का अर्पण करना न भूलें। भगवान की भव्यता और उनके शांत स्वरूप का ध्यान करने मात्र से ही आधे कष्ट दूर होने लगते हैं।
मोदक का भोग और पूजा के आवश्यक चरण
गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए दूर्वा (घास) का चढ़ाया जाना अनिवार्य माना गया है। इसके बाद शुद्ध देसी घी का दीपक और धूपबत्ती जलाकर वातावरण को सुगंधित और भक्तिमय बनाएं। भोग के रूप में बप्पा को (Ganesh Chaturthi Modak) या बेसन के लड्डू अर्पित करें, क्योंकि ये उन्हें अत्यंत प्रिय हैं। व्रत के दौरान पूरे दिन भगवान के नाम का स्मरण करें और संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। कथा सुनने से व्रत की पूर्णता होती है और पुण्य फलों में वृद्धि होती है।
चंद्र दर्शन और व्रत पारण की धार्मिक परंपरा
संकष्टी चतुर्थी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक कि रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य न दिया जाए। शाम की आरती के बाद चंद्रोदय का इंतजार करें और (Moon Sighting Tradition) का पालन करते हुए चंद्रमा को जल अर्पित करें। इसके पश्चात ही अपने व्रत का पारण करें। अगले दिन ब्राह्मणों को या जरूरतमंदों को सफेद और हरी वस्तुओं, जैसे मूंग की दाल या सफेद वस्त्र का दान करना विशेष रूप से कल्याणकारी माना गया है। यह परंपरा साधक के जीवन में संतुलन और उदारता का भाव लाती है।
शक्तिशाली मंत्रों का जाप और दिव्य ऊर्जा का संचार
पूजा के समय मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करने से घर में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। साधक को ‘वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ’ जैसे (Ganesh Mantra Chanting) प्रभावशाली सूत्रों का पाठ करना चाहिए। इसके अलावा द्वादश नामों का जाप करने से चारों दिशाओं से रक्षा होती है और कार्यों में निर्विघ्न सफलता प्राप्त होती है। वर्ष 2026 में पड़ने वाले अन्य महत्वपूर्ण व्रत जैसे प्रदोष और एकादशी की सूचियां भी आध्यात्मिक उन्नति के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। श्रद्धा भाव से की गई यह आराधना आपके जीवन को खुशियों से सराबोर कर देगी।



