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Relationship Advice – जीवनसाथी चुनने से पहले समझें इन जरूरी संकेतों को…

Relationship Advice – सही जीवनसाथी मिल जाए तो जिंदगी में सुकून और भरोसे की जगह बनती है, लेकिन अगर फैसला जल्दबाजी में लिया जाए तो वही रिश्ता बोझ भी बन सकता है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में रिश्ते बनना आसान हो गया है, पर उन्हें निभाना उतना ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में शादी जैसा अहम फैसला सोच-समझकर लेना जरूरी है। रिलेशनशिप कोच आनंद हांडा का कहना है कि चाहे लव मैरिज हो या अरेंज मैरिज, किसी भी रिश्ते में कदम रखने से पहले कुछ बुनियादी बातों को समझना बेहद जरूरी है। सही साथी का चुनाव केवल दिल से नहीं, समझदारी से भी होना चाहिए।

करियर को लेकर उसकी सोच पर दें ध्यान

किसी भी रिश्ते में भविष्य की योजनाएं अहम भूमिका निभाती हैं। कोच आनंद हांडा के अनुसार शादी से पहले यह समझना जरूरी है कि सामने वाला आपके करियर और पेशेवर सपनों को किस नजर से देखता है। कुछ मुलाकातों में ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह आपके काम को सम्मान देता है या नहीं। क्या वह चाहता है कि शादी के बाद भी आप अपने पेशे को जारी रखें? क्या वह आपके लक्ष्यों को लेकर सकारात्मक है? अगर कोई व्यक्ति आपके सपनों को हल्के में लेता है या उन्हें नजरअंदाज करता है, तो यह आने वाले समय में मतभेद का कारण बन सकता है। स्वस्थ रिश्ता वही है जहां दोनों एक-दूसरे के विकास में सहयोगी बनें।

आर्थिक मामलों में संतुलित रवैया जरूरी

शुरुआती बातचीत में अगर कोई बार-बार आपकी आमदनी, खर्च या बचत को लेकर सवाल करे तो इसे सामान्य बात मानकर नजरअंदाज न करें। आर्थिक पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा दिलचस्पी असहज संकेत भी हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि समझदार व्यक्ति साथी की सोच, व्यवहार और मूल्यों को प्राथमिकता देता है, न कि सिर्फ उसकी आय को। शादी भरोसे और आपसी समझ पर टिकती है, न कि हिसाब-किताब पर। अगर बातचीत का केंद्र बार-बार पैसों पर आ रहा है, तो यह सोचने का विषय हो सकता है।

परिवार के प्रति उसका व्यवहार क्या कहता है

किसी व्यक्ति का अपने परिवार के प्रति नजरिया उसके स्वभाव की झलक देता है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि वह अपने माता-पिता और भाई-बहनों के बारे में किस तरह बात करता है। क्या वह रिश्तों को महत्व देता है? क्या वह परिवार के साथ संतुलन बनाए रखता है? साथ ही यह भी समझना जरूरी है कि वह भविष्य में आपकी बातों को कितनी अहमियत देगा। जो व्यक्ति हर स्थिति में सिर्फ अपने परिवार का पक्ष लेता है और जीवनसाथी की भावनाओं को नजरअंदाज करता है, वहां सामंजस्य बनाना कठिन हो सकता है। संतुलन और सम्मान किसी भी रिश्ते की बुनियाद होते हैं।

जिम्मेदारियों और पृष्ठभूमि को जानना भी जरूरी

शादी केवल भावनाओं का नहीं, जिम्मेदारियों का भी साथ है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि सामने वाले पर किस तरह की जिम्मेदारियां हैं। क्या वह किसी आर्थिक दायित्व से जुड़ा है? क्या उसके परिवार की पूरी जिम्मेदारी उसी पर है? भविष्य में किन जिम्मेदारियों के बढ़ने की संभावना है? इन सवालों को पूछना असहज नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझदारी है। इससे आने वाले जीवन की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होती है और निर्णय संतुलित तरीके से लिया जा सकता है।

‘ना’ सुनने पर उसका व्यवहार देखें

रिश्ते में बराबरी तभी संभव है जब दोनों की राय को सम्मान मिले। कोच आनंद हांडा का सुझाव है कि बातचीत के दौरान हर बात पर सहमति जताना जरूरी नहीं। कभी-कभी साफ तौर पर ‘ना’ कहना भी जरूरी है। इससे यह समझ आता है कि सामने वाला आपकी असहमति को कैसे लेता है। क्या वह नाराज होता है या आपकी बात को समझने की कोशिश करता है? जो व्यक्ति आपकी राय को महत्व देता है और मतभेद को सम्मान के साथ संभालता है, वही आगे चलकर भरोसेमंद साथी साबित हो सकता है।

शादी का फैसला जीवन बदल देता है। इसलिए भावनाओं के साथ-साथ विवेक से काम लेना जरूरी है। सही सवाल पूछना और संकेतों को समझना भविष्य की खुशहाल जिंदगी की मजबूत नींव बन सकता है।

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