LunarEclipse – यहाँ पढ़ें क्या है गर्भवती महिलाओं के लिए खास सावधानी…
LunarEclipse – चंद्र ग्रहण को भारतीय परंपराओं में एक विशेष खगोलीय घटना माना जाता है। विज्ञान की दृष्टि से यह पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की स्थिति के कारण घटित होने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इसे संवेदनशील समय भी माना गया है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को लेकर कई तरह की सावधानियां बताई जाती हैं।

3 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इसका सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रभावी माना जाएगा। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई दे सकता है, जिसे आम बोलचाल में ब्लड मून कहा जाता है।
गर्भवती महिलाओं से जुड़ी पारंपरिक मान्यताएं
धार्मिक विश्वासों के अनुसार ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसी वजह से गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है, फिर भी कई परिवार परंपरा के आधार पर इनका पालन करते हैं।
आमतौर पर ग्रहण के दौरान बाहर न निकलने, खुले आसमान के नीचे अधिक समय न बिताने और यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। कुछ लोग खाना पकाने या भोजन करने से भी परहेज करते हैं।
मंत्र जप और ध्यान का सुझाव
आस्था रखने वाले परिवारों में ग्रहण काल के दौरान ईश्वर स्मरण और मंत्र जाप को सकारात्मक माना जाता है। गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण मानसिक शांति के लिए किया जाता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ध्यान या प्रार्थना जैसी गतिविधियां तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान मानसिक संतुलन और शांति महत्वपूर्ण होती है, इसलिए शांत वातावरण में बैठकर सकारात्मक विचारों पर ध्यान देना लाभकारी हो सकता है।
किन बातों से बचने की सलाह
पारंपरिक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि ग्रहण के दौरान नुकीली या धारदार वस्तुओं जैसे चाकू, कैंची या सुई का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके पीछे यह विश्वास है कि इससे गर्भस्थ शिशु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कई लोग ग्रहण शुरू होने से पहले घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने की सलाह देते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद घर की सफाई और स्नान जैसी शुद्धि प्रक्रियाएं भी की जाती हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण क्या कहता है?
चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, चंद्र ग्रहण का गर्भवती महिला या भ्रूण पर प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रभाव साबित नहीं हुआ है। फिर भी यदि कोई महिला धार्मिक आस्था के कारण सावधानी बरतना चाहती है, तो यह व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गर्भवती महिलाएं नियमित आहार लें, पर्याप्त पानी पिएं और चिकित्सक की सलाह का पालन करें। यदि किसी भी प्रकार की असुविधा महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाएं प्रकृति का हिस्सा हैं। परंपरा और विज्ञान के बीच संतुलन बनाकर ही सुरक्षित और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है।



