Kharmas – मार्च में शुरू होगा खरमास, जानें कब तक रहेंगे मांगलिक कार्य वर्जित
Kharmas – हिंदू पंचांग में ग्रहों की स्थिति के आधार पर कई ऐसे समय बताए गए हैं, जिनका धार्मिक और पारंपरिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। इन्हीं अवधियों में से एक है खरमास, जिसे कुछ कार्यों के लिए अशुभ समय माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार जब सूर्य विशेष राशियों में प्रवेश करता है, तब यह अवधि शुरू होती है। वर्ष में दो बार आने वाला यह समय धार्मिक परंपराओं के कारण कई परिवारों की योजनाओं को भी प्रभावित करता है।

सूर्य के गोचर से तय होती है खरमास की अवधि
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य राशि चक्र की अंतिम राशि मीन में प्रवेश करता है, तब खरमास की शुरुआत मानी जाती है। इसे वर्ष का पहला खरमास कहा जाता है। इसी प्रकार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है, तब वर्ष का दूसरा खरमास लगता है।
पारंपरिक मान्यता यह भी है कि इन राशियों में सूर्य के आने से उसका प्रभाव अपेक्षाकृत कमजोर माना जाता है। इसी कारण इस अवधि में नए और शुभ कार्य शुरू करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। हालांकि धार्मिक मान्यताओं का पालन करना या न करना व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है।
इस वर्ष कब से शुरू हो रहा है खरमास
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 का पहला खरमास मार्च महीने के मध्य में शुरू होगा। ज्योतिषीय गणना बताती है कि 14 मार्च 2026 की रात को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेगा।
सूर्य का यह गोचर रात 12 बजकर 41 मिनट पर होगा। इसके बाद अगले दिन यानी 15 मार्च से खरमास की अवधि मानी जाएगी। इस दिन से लेकर लगभग एक महीने तक पारंपरिक रूप से शुभ और मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
कब समाप्त होगा यह काल
खरमास की यह अवधि करीब एक महीने तक रहती है। पंचांग के अनुसार इसका समापन 14 अप्रैल 2026 को होगा।
15 मार्च से 14 अप्रैल के बीच कई परिवार विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत या अन्य मांगलिक कार्यक्रमों को स्थगित कर देते हैं। धार्मिक मान्यता यह है कि इस समय शुरू किए गए कार्यों में अपेक्षित सफलता मिलने में बाधाएं आ सकती हैं। इसी कारण बहुत से लोग इस अवधि के बाद ही अपने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं।
इस अवधि में किन कार्यों से बचने की सलाह
धार्मिक परंपराओं के अनुसार खरमास के दौरान कुछ विशेष कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि यह समय आध्यात्मिक गतिविधियों, दान और पूजा-पाठ के लिए अधिक उपयुक्त होता है, जबकि बड़े सामाजिक आयोजन स्थगित रखना बेहतर माना जाता है।
सबसे पहले विवाह जैसे मांगलिक कार्यक्रम इस अवधि में सामान्यतः नहीं किए जाते। नई दुल्हन का गृह प्रवेश भी इस समय टालने की सलाह दी जाती है।
इसी तरह घर से जुड़े धार्मिक आयोजन जैसे गृह प्रवेश, वास्तु पूजा या शांति पाठ भी इस दौरान आयोजित नहीं किए जाते। कई लोग इन कार्यक्रमों के लिए खरमास समाप्त होने के बाद शुभ मुहूर्त निकालते हैं।
इसके अलावा परंपरागत मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि इस अवधि में नई गाड़ी खरीदने या संपत्ति से जुड़े बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। यदि किसी ने पहले से बुकिंग कर रखी हो तो कई लोग डिलीवरी की तारीख आगे बढ़ाने का विकल्प चुनते हैं।
धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो खरमास को संयम और साधना का समय भी माना जाता है। इस दौरान कई लोग पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक गतिविधियों में अधिक समय देने की परंपरा का पालन करते हैं।


