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JodhpuriAloo – देसी मसालों और खास तेल से बनी राजस्थान की शाही सब्जी

JodhpuriAloo – राजस्थान का खानपान अपनी तेज खुशबू, देसी मसालों और अलग तरह की कुकिंग तकनीक के लिए जाना जाता है। यहां की रेसिपीज कम सामग्री में भी गहरा स्वाद रचने की कला सिखाती हैं। इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में जोधपुरी आलू एक खास पहचान रखता है। मशहूर शेफ रणवीर बरार ने इस क्लासिक रेसिपी को अपने अंदाज में पेश किया है, जिसमें तिल के तेल की खुशबू, दही की हल्की खटास और आमचूर का संतुलित स्वाद इस सब्जी को साधारण आलू की सब्जी से अलग बनाता है।

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जोधपुरी आलू की खासियत क्या है

जोधपुरी आलू की पहचान उसके मसालों और पकाने के तरीके से होती है। इसमें न तो ज्यादा ग्रेवी होती है और न ही भारी मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। तिल के तेल में भुने देसी मसाले और दही का हल्का मिश्रण आलू को अंदर तक स्वाद से भर देता है। यही वजह है कि यह डिश राजस्थानी थाली में खास जगह रखती है और हर उम्र के लोगों को पसंद आती है।

दही के मिश्रण से होती है शुरुआत

इस रेसिपी की पहली अहम कड़ी दही का हल्का घोल तैयार करना है। दही में थोड़ा पानी मिलाकर इसे अच्छे से फेंट लिया जाता है, जिससे गांठ न रहे और टेक्सचर स्मूद बने। इसके बाद घी में बेबी आलू को हल्दी और नमक के साथ हल्का सा पकाया जाता है। इसी दौरान दही का यह मिश्रण डाला जाता है, जिससे आलू नरम भी होते हैं और उनमें हल्की क्रीमी परत भी चढ़ जाती है। यह प्रक्रिया आलू को अंदर तक स्वादिष्ट बनाने में मदद करती है।

मसालों से उभरता है असली जोधपुरी स्वाद

जोधपुरी आलू का असली रंग और खुशबू तब सामने आती है, जब कड़ाही में तिल का तेल अच्छी तरह गर्म किया जाता है। इसमें जीरा, सौंफ, अजवाइन, कुटी हुई लाल मिर्च और सूखी कश्मीरी मिर्च डाली जाती है। जैसे ही ये मसाले तेल में चटकते हैं, पूरे किचन में पारंपरिक राजस्थानी खुशबू फैल जाती है। इसके बाद हींग, अदरक, हरी मिर्च और धनिये की जड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, जो इस डिश को गहराई और अलग पहचान देता है।

बेबी आलू को सही तरह से पकाना जरूरी

अब पहले से तैयार बेबी आलू को मसालों में डालकर हल्के हाथ से चलाया जाता है। जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी मिलाकर सब्जी को मध्यम आंच पर पकने दिया जाता है, ताकि मसाले अच्छी तरह आलू में समा जाएं। पकने के आखिरी चरण में आमचूर पाउडर डाला जाता है, जो स्वाद में हल्की खटास लाकर मसालों का संतुलन बनाए रखता है। अंत में ताजा हरा धनिया डालकर सब्जी को तैयार किया जाता है।

परोसने का पारंपरिक अंदाज

जोधपुरी आलू को परोसते समय इसकी सजावट भी खास होती है। ऊपर से भुने हुए सफेद तिल और धनिये की टहनी डालने से यह सब्जी देखने में भी आकर्षक लगती है। इसे गरमा-गरम पराठे, बाजरे की रोटी या सादी रोटी के साथ परोसा जाता है। यह डिश साबित करती है कि सीमित सामग्री और सही तकनीक से भी शाही स्वाद हासिल किया जा सकता है।

शेफ की खास सलाह

शेफ रणवीर बरार के अनुसार, इस रेसिपी में तिल के तेल का इस्तेमाल बेहद जरूरी है, क्योंकि यही जोधपुरी स्वाद की पहचान है। आमचूर को हमेशा अंत में डालना चाहिए, ताकि कड़वाहट न आए। वहीं धनिये की जड़ें इस डिश का छुपा हुआ स्वाद मानी जाती हैं, जो इसे बाकी आलू की सब्जियों से अलग बनाती हैं।

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