Healing After Heartbreak: जया किशोरी ने बताया ब्रेकअप के बाद खुद को संभालने का सबसे अचूक मंत्र…
Healing After Heartbreak: मशहूर कथावाचक और मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी अपनी आध्यात्मिक बातों के साथ-साथ व्यावहारिक जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालती हैं। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘जो है, ठीक है’ में मानवीय संवेदनाओं, विशेषकर रिश्तों और ब्रेकअप (Navigating Emotional Heartbreak) के कठिन दौर पर विस्तार से चर्चा की है। उनका मानना है कि किसी को याद करना कमजोरी नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक मानवीय प्रक्रिया है। जब कोई रिश्ता टूटता है, तो मन में उठने वाले तूफानों को दबाने के बजाय उन्हें स्वीकार करना ही मानसिक शांति की पहली सीढ़ी है।

यादों को दबाने के बजाय स्वीकारें
जया किशोरी के अनुसार, अक्सर लोग अपनी पुरानी यादों से भागने या उन्हें जबरन मिटाने की कोशिश करते हैं, जो मानसिक तनाव और घुटन पैदा करता है। वह कहती हैं कि (Processing Past Memories) के दौरान हमें यह समझना चाहिए कि जीवन हमारी कल्पनाओं के अनुसार नहीं चलता। चाहे वह करियर हो या रिश्ते, जब चीजें बिखरती हैं, तो सबसे ज्यादा पीड़ा उस जुड़ाव के टूटने से होती है जिसे हमने संजोया था। इन यादों को भुलाना इसलिए कठिन है क्योंकि हमने उनमें अपने जीवन के बेहतरीन पल निवेश किए होते हैं।
मानवीय भावनाओं का मशीन से कोई मुकाबला नहीं
रिश्ते टूटने के बाद अक्सर लोग खुद को अपराधी महसूस करने लगते हैं या अपनी भावनाओं पर शर्मिंदा होते हैं। जया किशोरी स्पष्ट करती हैं कि (Normalizing Human Emotions) इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। हम कोई मशीन नहीं हैं कि एक बटन दबाते ही सारा डेटा डिलीट हो जाए। जिन लोगों के साथ हमने अनगिनत घंटे बिताए हों, उनकी याद आना बिल्कुल स्वाभाविक है। भावनाओं को दबाने की कोशिश उन्हें और अधिक तीव्र बना देती है, इसलिए उन्हें खुलकर महसूस करना ही सही समाधान है।
क्यों आती है केवल सुखद पलों की याद
अक्सर ब्रेकअप के बाद हमारा मन केवल पुरानी अच्छी बातों और सुनहरे पलों को ही याद करता है। जया किशोरी इस मनोवैज्ञानिक स्थिति (Selective Memory Distortion) को समझाते हुए कहती हैं कि हमारा मन नकारात्मकता को पीछे धकेल कर केवल उन पलों में उलझा रहता है जो हमें खुशी देते थे। यही कारण है कि इंसान बार-बार उसी पुराने रिश्ते में वापस जाने की चाहत रखने लगता है, भले ही वह रिश्ता उसके भविष्य या आत्म-विकास के लिए कितना ही गलत क्यों न रहा हो।
रोने की अनुमति और भावनात्मक मजबूती
यदि किसी की कमी सता रही है और मन भारी है, तो जया किशोरी का सुझाव है कि खुद को रोने से न रोकें। उनका मानना है कि (Crying for Emotional Release) मन को हल्का करने का एक प्रभावी जरिया है। वह कहती हैं, ‘जी भरकर रो लीजिए, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।’ ऐसा करने से आप कमजोर नहीं होते, बल्कि अपनी भावनाओं का सामना करने की हिम्मत जुटाते हैं। यही ईमानदारी भविष्य में आपको एक मजबूत व्यक्तित्व के रूप में उभरने में मदद करती है।
अपमान और चोट को न भूलें
अक्सर सुनहरी यादों के धुएं में हम उन कड़वे अनुभवों को भूल जाते हैं जिनकी वजह से रिश्ता टूटा था। जया किशोरी आगाह करती हैं कि (Remembering Self Respect) अत्यंत आवश्यक है। जब मन वापस लौटने की जिद करे, तो खुद को वह अपमान, वह मानसिक चोट और वह दर्द याद दिलाएं जो आपने सहा था। अच्छी यादों में डूबकर अपनी गरिमा और आत्म-सम्मान से समझौता करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। वास्तविकता को याद रखना ही आपको किसी गलत फैसले से बचा सकता है।
वास्तविकता और संतुलन का महत्व
अंत में, जया किशोरी का संदेश बहुत स्पष्ट है कि किसी को याद करना गलत नहीं है, लेकिन उन कड़वे अनुभवों को भूल जाना हानिकारक है जिन्होंने आपको पीड़ा दी थी। जीवन में (Balancing Memories and Reality) ही आगे बढ़ने का एकमात्र मार्ग है। सुंदर यादों को एक अनुभव की तरह संजोएं, लेकिन अपनी वर्तमान शांति और आत्म-सम्मान को दांव पर न लगाएं। जो बीत गया उसे स्वीकार करना और वर्तमान में जीना ही असली आध्यात्मिकता और मानसिक परिपक्वता है।



