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GrapeCity – जानिए क्यों नासिक कहलाता है अंगूरों की राजधानी…

GrapeCity – भारत के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे शहर हैं जो अपनी किसी खास पहचान की वजह से देशभर में मशहूर हैं। कहीं चाय के बागान पहचान बनाते हैं तो कहीं मसालों की खुशबू। महाराष्ट्र का नासिक भी ऐसा ही शहर है, जिसे अंगूरों की राजधानी के नाम से जाना जाता है। यहां की फसल, मौसम और मिट्टी ने इसे देश के प्रमुख अंगूर उत्पादक क्षेत्रों में शामिल कर दिया है। यही वजह है कि नासिक का नाम अब सिर्फ एक धार्मिक या ऐतिहासिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि कृषि और वाइन उद्योग के केंद्र के रूप में भी लिया जाता है।

नासिक को क्यों कहा जाता है अंगूरों की राजधानी

नासिक में अंगूर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। शहर और उसके आसपास के इलाकों में फैले खेतों में आपको बेलों से लटकते अंगूरों के गुच्छे आसानी से नजर आ जाएंगे। यहां पैदा होने वाले अंगूर अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए पहचाने जाते हैं। यही नहीं, यहां से देश के अलग-अलग राज्यों में बड़ी मात्रा में अंगूर भेजे जाते हैं।

नासिक का नाम ग्रेप सिटी इसलिए भी पड़ा क्योंकि यहां का उत्पादन केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। यहां की उपज अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी जगह बना चुकी है। कई व्यापारी सीधे किसानों से अंगूर खरीदकर उन्हें देश-विदेश में सप्लाई करते हैं।

उत्पादन के आंकड़े और निर्यात की स्थिति

नासिक जिले में करीब 1.75 लाख हेक्टेयर भूमि पर अंगूर की खेती की जाती है। यह आंकड़ा इसे भारत का सबसे बड़ा अंगूर उत्पादक क्षेत्र बनाता है। यहां की जलवायु और भौगोलिक स्थिति खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। पश्चिमी घाट की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां का तापमान और मिट्टी की गुणवत्ता अंगूर के लिए उपयुक्त रहती है।

नासिक से अंगूर केवल भारतीय बाजारों में ही नहीं पहुंचते, बल्कि यूरोप के कई देशों में भी निर्यात किए जाते हैं। नीदरलैंड, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और रूस जैसे देशों में यहां के अंगूर भेजे जाते हैं। निर्यात के लिए गुणवत्ता की सख्त जांच की जाती है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरा जा सके।

वाइन उद्योग ने दी नई पहचान

नासिक को सिर्फ अंगूर उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि वाइन उद्योग के लिए भी जाना जाता है। यहां 50 से अधिक वाइनरी संचालित हैं। इन वाइनरी में अलग-अलग किस्मों के अंगूरों से वाइन तैयार की जाती है। यही कारण है कि नासिक को वाइन कैपिटल भी कहा जाता है।

यहां Thompson Seedless, Sharad Seedless और Flame Seedless जैसी किस्में प्रमुख रूप से उगाई जाती हैं। इनसे तैयार की गई वाइन देश और विदेश दोनों बाजारों में पसंद की जाती है। वाइनरी पर्यटन भी यहां तेजी से बढ़ा है। कई पर्यटक अंगूर के बागों और वाइन बनाने की प्रक्रिया को करीब से देखने के लिए नासिक पहुंचते हैं।

खेती और पर्यटन का संगम

नासिक की पहचान केवल कृषि तक सीमित नहीं है। यह शहर धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। अगर कोई पर्यटक यहां आता है तो वह अंगूर के खेतों और वाइनरी के साथ-साथ कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थानों की सैर भी कर सकता है।

हरिहर किला ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए आकर्षण का केंद्र है। गोदावरी नदी के किनारे स्थित रामकुंड आस्था और शांति का अनुभव कराता है। पांडवलेणी गुफाएं अपनी प्राचीन नक्काशी और स्थापत्य के लिए जानी जाती हैं। वहीं सोमेश्वर जलप्रपात और उसके पास स्थित मंदिर पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक वातावरण दोनों का अनुभव कराते हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान

अंगूर की खेती और वाइन उद्योग ने नासिक की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। हजारों किसान और मजदूर इस क्षेत्र से जुड़े हैं। निर्यात और प्रोसेसिंग यूनिट्स ने रोजगार के अवसर भी बढ़ाए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की आय में भी सुधार हुआ है।

कुल मिलाकर, नासिक ने अपनी जलवायु, कृषि क्षमता और उद्योग के मेल से एक अलग पहचान बनाई है। अंगूरों की बहार और वाइन उद्योग की वजह से यह शहर कृषि और पर्यटन दोनों के नक्शे पर अहम स्थान रखता है।

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