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FacultyRecruitment – महाराष्ट्र में दो साल बाद शिक्षकों की भर्ती शुरू

FacultyRecruitment – करीब दो वर्ष के अंतराल के बाद महाराष्ट्र सरकार ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। 11 फरवरी 2026 को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी सरकारी प्रस्ताव के अनुसार इस चरण में लगभग 650 पदों पर भर्ती की जाएगी। इनमें असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पद शामिल हैं। लंबे समय से रुकी इस प्रक्रिया के दोबारा शुरू होने से उच्च शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत अस्थायी और अनुबंधित शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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रुकी प्रक्रिया को मिली नई दिशा

दरअसल, वर्ष 2024 में भर्ती अभियान शुरू किया गया था, लेकिन चयन मानदंडों को लेकर राज्य सरकार और राज्यपाल कार्यालय के बीच मतभेद के कारण प्रक्रिया ठप हो गई थी। अब नए प्रस्ताव में पूर्व में किए गए कुछ बदलावों को निरस्त कर संशोधित दिशानिर्देश लागू किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस बार चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और संतुलित होगी।

60:20:20 फॉर्मूला लागू

नई व्यवस्था के तहत चयन 60:20:20 के फार्मूले पर आधारित होगा। कुल 100 अंकों की मेरिट सूची तैयार की जाएगी। इसमें शैक्षणिक और शोध उपलब्धियों को 60 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। शिक्षण कौशल के मूल्यांकन के लिए 20 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं, जबकि साक्षात्कार को 20 प्रतिशत वेटेज मिलेगा। उम्मीदवारों को चयन सूची में स्थान पाने के लिए कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

मॉक लेक्चर अब अनिवार्य

इस भर्ती प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को चयन समिति के सामने मॉक लेक्चर देना होगा। इसके माध्यम से उनकी पढ़ाने की क्षमता, विषय की स्पष्टता, संप्रेषण कौशल और आधुनिक शिक्षण साधनों के उपयोग का आकलन किया जाएगा।
साक्षात्कार के दौरान विषय ज्ञान के साथ-साथ आलोचनात्मक सोच और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समझ का भी परीक्षण किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शिक्षण गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

प्रकाशन और ग्रेडिंग में संशोधन

सरकार ने कुछ प्रकाशन संबंधी शर्तों में भी संशोधन किया है। उदाहरण के तौर पर, एंथ्रोपोलॉजी विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशन की अनिवार्यता को कुछ हद तक सरल किया गया है। पुस्तकों के प्रकाशन को भी अंक देने की व्यवस्था में शामिल किया गया है।
संशोधित ग्रेडिंग प्रणाली का उद्देश्य उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले अभ्यर्थियों को समान अवसर देना है। चयन के दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग संस्थानों जैसे NIRF और QS को भी ध्यान में रखा जाएगा।

अनुभव को मिलेगा महत्व

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि घंटों के आधार पर, अनुबंध पर या एडहॉक व्यवस्था में कार्य कर रहे शिक्षकों को इस निर्णय से लाभ होगा। उनके कार्यानुभव को मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा, जिससे लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को अवसर मिल सके।

पारदर्शिता पर जोर

भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए चयन समिति की बैठकों की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है। अंतिम मेरिट सूची संबंधित विश्वविद्यालयों की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। इस कदम का स्वागत शिक्षकों के संगठनों ने किया है और इसे अधिक जवाबदेह प्रणाली की दिशा में सकारात्मक पहल बताया है।

आगे और भर्तियों की तैयारी

विभागीय सूत्रों के अनुसार सरकार शीघ्र ही लगभग 5200 शिक्षकों और करीब 1200 गैर-शिक्षण कर्मचारियों के पदों को भरने के लिए अलग प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। यदि यह योजना लागू होती है तो राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों में लंबे समय से चल रही पद रिक्तियों की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।

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