ExamStress – इस लेख को जरूर पढ़ें परीक्षा के दबाव से जूझते विद्यार्थी
ExamStress – भारतीय समाज में परीक्षाएं केवल पढ़ाई का आकलन भर नहीं रह गई हैं, बल्कि उन्हें प्रतिष्ठा और भविष्य की दिशा से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि परीक्षा का समय आते ही कई छात्र अनजाने दबाव में आ जाते हैं। किताबों से ज्यादा उन्हें अपेक्षाओं का बोझ परेशान करता है। डर सिर्फ सवालों का नहीं होता, बल्कि इस बात का होता है कि परिणाम क्या संदेश देगा—घरवालों को, रिश्तेदारों को और समाज को। ऐसे माहौल में परीक्षा का दौर कई विद्यार्थियों के लिए मानसिक संघर्ष में बदल जाता है।

तुलना की संस्कृति से बढ़ता दबाव
परीक्षा के तनाव की जड़ें अक्सर घर और समाज से शुरू होती हैं। बच्चों की तुलना पड़ोस या रिश्तेदारों के अधिक अंक लाने वाले छात्रों से करना आम बात है। अनजाने में यह तुलना आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है। छात्र खुद को दूसरों के पैमाने पर आंकने लगते हैं और अपनी क्षमताओं पर संदेह करने लगते हैं।
सीमित अवसर और बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी तनाव को बढ़ाती है। कई विद्यार्थियों को लगता है कि एक परीक्षा में चूक उनके पूरे भविष्य को प्रभावित कर सकती है। यह सोच ही उन्हें असामान्य दबाव में डाल देती है।
अंक केंद्रित शिक्षा का प्रभाव
हमारी शिक्षा व्यवस्था में अब भी अंकों को सफलता का प्रमुख पैमाना माना जाता है। सीखने की प्रक्रिया का आनंद पीछे छूट जाता है और लक्ष्य केवल अधिक से अधिक अंक लाना रह जाता है। ऐसे माहौल में विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने के बजाय प्रदर्शन की चिंता में उलझ जाते हैं।
अभिभावकों की अपेक्षाएं भी कई बार अनजाने में बोझ बन जाती हैं। हर माता-पिता अपने बच्चे को सफल देखना चाहते हैं, लेकिन जब उम्मीदें यथार्थ से परे चली जाती हैं, तो छात्र पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है।
तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक तरीके
तनाव को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं, लेकिन उसे संतुलित जरूर किया जा सकता है। पढ़ाई के लिए एक संतुलित और व्यवहारिक समय-सारणी बनाना मददगार साबित होता है। लंबे समय तक लगातार पढ़ाई करने से दिमाग थक जाता है, इसलिए छोटे-छोटे विराम जरूरी हैं।
पर्याप्त नींद भी बेहद अहम है। सात से आठ घंटे की नींद लेने से स्मरण शक्ति बेहतर रहती है और ध्यान केंद्रित करने में आसानी होती है। केवल पढ़ने के बजाय लिखकर अभ्यास करना और पुराने प्रश्नपत्र हल करना आत्मविश्वास बढ़ाता है। इससे परीक्षा का माहौल परिचित लगता है।
हल्की शारीरिक गतिविधियां, जैसे टहलना या योग, मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होती हैं। संतुलित आहार और पर्याप्त पानी शरीर को ऊर्जा देता है, जिसका सीधा असर मनोदशा पर पड़ता है।
अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण
परीक्षा के समय अभिभावकों का व्यवहार बच्चों के लिए बहुत मायने रखता है। उन्हें समर्थन देना चाहिए, न कि अनावश्यक दबाव। सकारात्मक बातचीत और प्रोत्साहन बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं।
यह समझना जरूरी है कि हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। परिणाम चाहे जो हो, प्रयास की सराहना करना छात्रों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
परीक्षा को मूल्यांकन के रूप में देखें
परीक्षा को जीवन-मरण का प्रश्न बनाने के बजाय उसे सीखने की प्रक्रिया का एक हिस्सा समझना जरूरी है। यदि विद्यार्थी, अभिभावक और समाज मिलकर इस सोच को अपनाएं कि परीक्षा केवल एक मूल्यांकन है, तो भय स्वतः कम हो सकता है।
नियमित अंतराल पर ब्रेक लेना, सकारात्मक माहौल बनाए रखना और नकारात्मक चर्चाओं से दूरी बनाना भी तनाव घटाने में सहायक है। संतुलित तैयारी और सही दृष्टिकोण के साथ परीक्षा का सामना अधिक आत्मविश्वास से किया जा सकता है।



