लाइफ स्टाइल

ButterChicken – बंटवारे के दर्द से जन्मी स्वाद की मशहूर कहानी

ButterChicken – बटर चिकन का नाम आते ही कई लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। मलाईदार ग्रेवी में डूबे चिकन के नरम टुकड़े और साथ में गर्म पराठे या नान—यह संयोजन सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि भारतीय खानपान की पहचान बन चुका है। दुनिया भर के रेस्तरां के मेन्यू में जगह बनाने वाली यह रेसिपी दरअसल एक कठिन दौर की देन है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका जन्म किसी शाही रसोई में नहीं, बल्कि विभाजन के समय की अनिश्चितताओं के बीच हुआ था।

पेशावर से दिल्ली तक का सफर

विभाजन से पहले पेशावर की गलियों में एक ढाबा काफी मशहूर था, जहां तंदूरी चिकन लोगों की पहली पसंद माना जाता था। इस ढाबे से जुड़े तीन साझेदार—कुंदन लाल गुजराल, कुंदन लाल जागी और ठाकुर दास—अपनी मेहनत से कारोबार चला रहे थे। 1947 में देश के बंटवारे ने लाखों परिवारों की तरह इन्हें भी विस्थापित कर दिया। सब कुछ पीछे छोड़कर ये लोग दिल्ली पहुंचे। नई शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पुरानी दिल्ली के दरियागंज में एक छोटी-सी जगह किराए पर लेकर उन्होंने ‘मोती महल’ नाम से अपना नया रेस्टोरेंट शुरू किया।

एक समस्या से निकला नया स्वाद

तंदूरी चिकन उस दौर में बेहद लोकप्रिय था, लेकिन इसकी एक बड़ी दिक्कत थी। अगर समय पर बिक न पाए तो चिकन सूखकर सख्त हो जाता था। इसे फेंक देना नुकसान था, और दोबारा परोसना मुश्किल। ऐसे में कुंदन लाल गुजराल ने एक प्रयोग करने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि अगर सूखे चिकन को किसी नई तरह की ग्रेवी में पकाया जाए तो शायद उसका स्वाद और बनावट सुधर सकती है।

उन्होंने टमाटर की प्यूरी, मक्खन, ताजी क्रीम और हल्के मसालों से एक गाढ़ी सॉस तैयार की। जब तंदूर में पके चिकन के टुकड़ों को इस ग्रेवी में धीमी आंच पर पकाया गया, तो नतीजा उम्मीद से बेहतर निकला। चिकन फिर से नरम हो गया और उसमें एक नया, समृद्ध स्वाद जुड़ गया। इसी प्रयोग से ‘मुरग मखनी’ या बटर चिकन का जन्म हुआ।

दिल्ली की पहचान बना व्यंजन

मोती महल में परोसी जाने वाली यह नई डिश जल्द ही चर्चा का विषय बन गई। दिल्ली आने वाले कई बड़े नेताओं और विदेशी मेहमानों ने इसका स्वाद चखा। बताया जाता है कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को यह व्यंजन काफी पसंद था। विदेशी मेहमानों को भी यहां आमंत्रित किया जाता था, जहां बटर चिकन खास तौर पर परोसा जाता था। धीरे-धीरे यह रेसिपी देश की सीमाओं से बाहर पहुंची और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय व्यंजन की पहचान बन गई।

पारंपरिक स्वाद की खासियत

असली बटर चिकन की कुछ विशेषताएं इसे अलग बनाती हैं। पारंपरिक विधि में प्याज का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि टमाटर और मक्खन इसकी ग्रेवी का आधार होते हैं। इसमें डाली गई कसूरी मेथी इसकी खुशबू को खास बनाती है। सबसे अहम बात यह है कि चिकन पहले तंदूर में पकाया जाता है, जिससे उसमें हल्का धुएं जैसा स्वाद आता है। यही स्वाद ग्रेवी के साथ मिलकर इसे खास बनाता है।

आज भले ही इसकी कई आधुनिक शैलियां मौजूद हों, लेकिन मूल रेसिपी का आकर्षण अब भी कायम है। बटर चिकन सिर्फ एक लोकप्रिय डिश नहीं, बल्कि उस दौर की कहानी भी है जब कठिन परिस्थितियों ने रचनात्मकता को जन्म दिया।

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