BoondiRaita – बूंदी रायता गाढ़ा होने से बचाने के आसान उपाय
BoondiRaita – बूंदी रायता भारतीय खाने की थाली का ऐसा हिस्सा है, जो साधारण दही को भी खास बना देता है। दाल-चावल, पुलाव या पराठे के साथ परोसा गया ठंडा रायता स्वाद को संतुलित करता है। लेकिन अक्सर शिकायत रहती है कि कुछ ही देर में रायता गाढ़ा होकर भारी हो जाता है। शुरुआत में जो रायता हल्का और मुलायम दिखता है, वही थोड़ी देर बाद चिपचिपा लगने लगता है। दरअसल, इसके पीछे एक साधारण-सी वजह है, जिसे समझ लेना जरूरी है।

बूंदी क्यों बदल देती है रायते की बनावट
रायते के गाढ़ा होने की सबसे बड़ी वजह खुद बूंदी है। बेसन से बनी बूंदी की बनावट ऐसी होती है कि वह स्पंज की तरह नमी सोखती है। जैसे ही उसे दही में मिलाया जाता है, वह धीरे-धीरे उसमें मौजूद पानी को अपने अंदर खींचने लगती है। समय बीतने के साथ दही की तरलता कम हो जाती है और रायता पहले से ज्यादा गाढ़ा महसूस होता है। अगर इसे लंबे समय तक रखा जाए तो उसकी बनावट पूरी तरह बदल सकती है।
बूंदी का चुनाव भी अहम
हर बूंदी एक जैसी नहीं होती। बाजार में मिलने वाली नमकीन बूंदी अक्सर सूखी और कड़ी होती है। ऐसी बूंदी दही की नमी ज्यादा तेजी से सोख लेती है। रायते के लिए बारीक और मुलायम बूंदी बेहतर मानी जाती है। अगर मोटी बूंदी ही उपलब्ध हो तो उसे हल्का-सा मसल लेना फायदेमंद रहता है। इससे उसकी सतह थोड़ी खुल जाती है और वह दही में संतुलित तरीके से मिलती है।
दही की सही तैयारी जरूरी
रायता बनाते समय दही की कंसिस्टेंसी पर ध्यान देना चाहिए। बहुत गाढ़ा या टंगा हुआ दही इस्तेमाल करने से समस्या बढ़ सकती है। ऐसे दही में पानी की मात्रा कम होती है, इसलिए बूंदी बची-खुची नमी भी खींच लेती है। बेहतर है कि दही को पहले अच्छी तरह फेंट लें और जरूरत हो तो थोड़ा ठंडा पानी मिलाकर उसे हल्का और स्मूद बना लें। इससे रायता ज्यादा देर तक संतुलित बना रहता है।
नमक कब डालें, इसका रखें ध्यान
कई लोग रायता बनाते समय शुरुआत में ही नमक मिला देते हैं। लेकिन यह तरीका सही नहीं माना जाता। नमक दही से नमी बाहर निकालता है, जिससे बूंदी को सोखने के लिए और तरल मिल जाता है। नतीजा यह होता है कि रायता जल्दी गाढ़ा हो जाता है। इसलिए नमक और मसाले परोसने से ठीक पहले मिलाना बेहतर रहता है। इससे स्वाद भी ताजा रहता है और बनावट भी ठीक बनी रहती है।
बूंदी भिगोने का सरल उपाय
अगर आप चाहते हैं कि रायता लंबे समय तक पतला और हल्का बना रहे, तो बूंदी को सीधे दही में न डालें। पहले उसे हल्के गुनगुने नमकीन पानी में दो-तीन मिनट भिगो दें। फिर हल्के हाथ से अतिरिक्त पानी निचोड़ लें। इस प्रक्रिया से बूंदी पहले ही थोड़ी नमी ले लेती है और बाद में दही को ज्यादा नहीं सोखती। यह छोटा-सा कदम रायते की गुणवत्ता में बड़ा फर्क ला सकता है।
मिलाने का सही समय
रायता अगर पहले से बनाकर रखना हो तो दही का मिश्रण अलग तैयार रखें और बूंदी को परोसने से दस-पंद्रह मिनट पहले ही मिलाएं। खासकर गर्म मौसम में बूंदी जल्दी फूलती है, जिससे रायता जल्दी गाढ़ा हो सकता है। इसलिए इसे ठंडा रखना और अंतिम समय में मिलाना बेहतर विकल्प है।
गाढ़ा हो जाए तो क्या करें
अगर फिर भी रायता ज्यादा गाढ़ा हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। उसमें थोड़ा ठंडा दूध, पानी या फेंटी हुई दही मिलाकर उसे फिर से संतुलित किया जा सकता है। हल्के हाथ से मिलाएं और स्वाद के अनुसार नमक समायोजित कर लें।
इन आसान उपायों से बूंदी रायता हर बार हल्का, स्वादिष्ट और संतुलित बन सकता है।



