लाइफ स्टाइल

BegunBhaja – बंगाल की पारंपरिक रेसिपी जो सादगी में रचती है खास स्वाद

BegunBhaja – बंगाल के पारंपरिक खानपान में कुछ व्यंजन ऐसे हैं, जो बिना ज्यादा तामझाम के भी अपनी गहरी पहचान बनाए हुए हैं। बैंगन भाजा उन्हीं में से एक है। यह रेसिपी न तो मसालों की भीड़ मांगती है और न ही किसी जटिल तैयारी की जरूरत होती है। सही तरीके से कटे बैंगन, चुटकी भर मसाले और सरसों का तेल मिलकर ऐसा स्वाद रचते हैं, जो साधारण दाल-चावल के साथ भी भोजन को खास बना देता है। यही वजह है कि आज भी बंगाली रसोई में बैंगन भाजा को रोजमर्रा के खाने का अहम हिस्सा माना जाता है।

WhatsApp Group Join Now

सादगी में छिपा पारंपरिक स्वाद

बैंगन भाजा की खासियत इसकी सादगी है। इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री सीमित होती है, लेकिन स्वाद में कोई कमी नहीं रहती। बंगाल में इसे आमतौर पर लंच या डिनर में दाल और उबले चावल के साथ परोसा जाता है। हल्का कुरकुरा बाहरी हिस्सा और अंदर से नरम बनावट इस डिश को हर उम्र के लोगों के लिए पसंदीदा बना देती है। घर के खाने में इसे इसलिए भी अहम माना जाता है क्योंकि यह जल्दी बन जाता है और पेट पर भारी भी नहीं पड़ता।

सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद

बैंगन में प्राकृतिक रूप से फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स और जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। जब बैंगन को कम मसालों और सही मात्रा में सरसों के तेल में पकाया जाता है, तो यह स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी संतुलित विकल्प बन जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अधिक मसालेदार और भारी भोजन की तुलना में ऐसे पारंपरिक व्यंजन शरीर के लिए अधिक अनुकूल होते हैं।

सामग्री जो हर रसोई में मिल जाए

बैंगन भाजा बनाने के लिए ज्यादा चीजों की जरूरत नहीं होती। एक बड़ा गोल बैंगन, हल्दी पाउडर, नमक, लाल मिर्च पाउडर और तलने के लिए सरसों का तेल पर्याप्त होता है। कुछ लोग हल्की कुरकुराहट के लिए चावल का आटा या सूजी का इस्तेमाल भी करते हैं, हालांकि पारंपरिक विधि में इसकी अनिवार्यता नहीं मानी जाती। यही सरलता इस रेसिपी को रोजमर्रा के खाने के लिए उपयुक्त बनाती है।

बैंगन तैयार करने का सही तरीका

इस रेसिपी के लिए बड़े और गोल बैंगन सबसे बेहतर माने जाते हैं। इन्हें धोकर करीब आधा इंच मोटे गोल स्लाइस में काटा जाता है। कटे हुए टुकड़ों को कुछ देर हल्के नमक वाले पानी में रखने से बैंगन की कड़वाहट निकल जाती है और तलते समय रंग भी अच्छा बना रहता है। यह छोटा सा कदम स्वाद और प्रस्तुति दोनों को बेहतर बना देता है।

मसालों का संतुलन है जरूरी

बैंगन के स्लाइस पर हल्दी, नमक और लाल मिर्च पाउडर हल्के हाथ से लगाया जाता है। मसालों की मात्रा इतनी ही रखी जाती है कि बैंगन का असली स्वाद दबे नहीं। अगर कोई अतिरिक्त कुरकुरापन चाहता है, तो ऊपर से थोड़ा सा चावल का आटा या सूजी छिड़क सकता है। हालांकि बंगाल में इसे बिना किसी अतिरिक्त परत के ही तलना अधिक पसंद किया जाता है।

सरसों के तेल में तलने की अहमियत

बैंगन भाजा का असली स्वाद सरसों के तेल से ही आता है। तवे या कड़ाही में तेल अच्छी तरह गर्म किया जाता है, जब तक उससे हल्का धुआं न उठने लगे। इसके बाद आंच मध्यम कर दी जाती है और बैंगन के स्लाइस धीरे-धीरे तेल में डाले जाते हैं। तेज आंच पर तलने से बैंगन बाहर से जल सकता है और अंदर से कच्चा रह सकता है, इसलिए धैर्य के साथ पकाना जरूरी होता है।

परोसने का पारंपरिक अंदाज

सुनहरे रंग के तले हुए बैंगन को टिशू पेपर पर निकालकर अतिरिक्त तेल सोख लिया जाता है। गरमागरम बैंगन भाजा सादी दाल, उबले चावल, खिचड़ी या रोटी के साथ परोसा जाता है। ऊपर से सरसों के तेल की कुछ बूंदें डाल दी जाएं, तो इसका स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। यही सादगी इसे खास बनाती है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.