AmalakiEkadashi – आज आमलकी एकादशी पर शुभ योगों का संयोग
AmalakiEkadashi – फाल्गुन शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी आज श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ मनाई जा रही है। कई स्थानों पर इसे रंगभरी एकादशी के रूप में भी जाना जाता है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि पूरे दिन प्रभावी रहेगी, जिससे व्रत और पूजा के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध है। इस बार आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवियोग और सौभाग्य योग जैसे कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिन्हें धार्मिक दृष्टि से अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है और श्रद्धालु भगवान विष्णु के पूजन के साथ व्रत का पालन कर रहे हैं।

आंवले के वृक्ष की पूजा का विधान
धार्मिक मान्यता के अनुसार आमलकी एकादशी पर आंवले के पेड़ के समीप भगवान विष्णु की पूजा करना पुण्यदायी माना जाता है। प्रातः स्नान के बाद श्रद्धालु आंवले के वृक्ष के पास जाकर स्थान को साफ करते हैं और विधिपूर्वक पूजन की तैयारी करते हैं। यदि घर के पास आंवले का पेड़ उपलब्ध न हो तो गमले में लगे पौधे के पास भी पूजा की जा सकती है। परंपरा के अनुसार एकादशी के दिन पूजा के बाद द्वादशी को वृक्ष की परिक्रमा की जाती है। 8 या 28 बार परिक्रमा करना शुभ बताया गया है। पूजा के दौरान दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित कर भगवान से कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
परशुराम पूजन की परंपरा
आमलकी एकादशी के अवसर पर भगवान परशुराम की पूजा का भी विधान है। श्रद्धालु उनकी प्रतिमा या चित्र को आंवले के वृक्ष के समीप स्थापित कर पूजन करते हैं। भूमि को स्वच्छ कर कलश स्थापना की जाती है और उस पर पुष्पमाला अर्पित की जाती है। इसके बाद धूप, दीप और चंदन से पूजन कर मंत्रोच्चार किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। पूजा के अंत में दीप प्रज्वलित कर भगवान से अर्घ्य स्वीकार करने की प्रार्थना की जाती है।
दान का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में आमलकी एकादशी पर दान को विशेष फलदायी बताया गया है। इस अवसर पर अन्न, वस्त्र, नया छाता या जूते का दान करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान कर सकते हैं। यह दान एकादशी के दिन या अगले दिन द्वादशी पर भी किया जा सकता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान जीवन में सुख-समृद्धि और संतुलन लाने में सहायक होता है।
रात्रि जागरण और भक्ति आयोजन
एकादशी की रात जागरण का भी विशेष महत्व है। भक्त भजन-कीर्तन, कथा-श्रवण और धार्मिक चर्चा के माध्यम से रात्रि व्यतीत करते हैं। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से विष्णु स्तुति और आरती का आयोजन होता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार रात्रि में 108 या 28 बार आंवले के वृक्ष की परिक्रमा करना भी पुण्यदायक माना गया है। प्रातःकाल भगवान विष्णु की आरती कर व्रत का समापन किया जाता है और ब्राह्मणों को भोजन कराने की परंपरा भी निभाई जाती है।
नक्षत्र और योग की स्थिति
पंचांग के अनुसार आज आर्द्रा नक्षत्र रात्रि 10 बजकर 30 मिनट तक प्रभावी रहेगा। आयुष्मान योग शाम 7 बजकर 34 मिनट तक विद्यमान है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ये योग धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं। साथ ही महापद्म नामक विशेष योग का भी संयोग बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।
धार्मिक महत्व और आस्था
ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार आमलकी एकादशी को पापों का नाश करने वाली तिथि माना गया है। इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान नारायण की कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक परंपराओं में यह व्रत विष्णु को समर्पित है और आंवले के वृक्ष को उनका प्रिय माना गया है। इसलिए वृक्ष के समीप बैठकर पूजा करने की परंपरा प्रचलित है। श्रद्धालु इस अवसर को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम मानते हैं।



