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WestAsiaCrisis – राज्यसभा में जयशंकर ने क्षेत्रीय तनाव और भारतीयों की सुरक्षा पर दिया बयान

WestAsiaCrisis – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर राज्यसभा में सोमवार को चर्चा का माहौल बना रहा। इस दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सदन को क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और भारत सरकार की तैयारियों के बारे में जानकारी दी। हालांकि उनके बयान के दौरान विपक्षी दलों की ओर से नारेबाजी और विरोध भी देखने को मिला।

विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में हालात को लेकर गंभीरता से स्थिति का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने 20 फरवरी को ही एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की थी।

प्रधानमंत्री घटनाक्रम पर रख रहे करीबी नजर

डॉ. जयशंकर ने सदन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस मुद्दे से जुड़े सभी घटनाक्रमों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय आपस में समन्वय बनाकर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत निर्णय लिया जा सके।

उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया का मौजूदा संघर्ष भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं और पढ़ाई करते हैं। ऐसे में वहां की स्थिति का सीधा प्रभाव भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका पर पड़ सकता है।

खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में रहते हैं भारतीय

विदेश मंत्री ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं। इसके अलावा ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और पेशेवर काम कर रहे हैं। इस कारण भारत सरकार के लिए वहां के हालात पर लगातार नजर रखना जरूरी है।

उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया का क्षेत्र भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अहम माना जाता है। भारत की तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। यदि किसी कारण से सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो इसका असर देश की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ सकता है।

क्षेत्रीय तनाव से सुरक्षा स्थिति प्रभावित

जयशंकर ने कहा कि हाल के दिनों में इस क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता गया है, जिससे सुरक्षा की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसके कारण वहां सामान्य जीवन और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस संकट के दौरान भारत ने अपने दो नाविकों को खो दिया है, जबकि एक नाविक अभी भी लापता बताया जा रहा है। सरकार संबंधित एजेंसियों के माध्यम से इस मामले पर भी लगातार जानकारी जुटा रही है।

तेहरान में भारतीय दूतावास सतर्क

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और वहां उच्च स्तर की सतर्कता बरती जा रही है।

दूतावास की ओर से छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में सहायता दी जा रही है। इसके अलावा ईरान में मौजूद भारतीय व्यापारियों को भी सुरक्षित तरीके से देश लौटने में मदद की गई है। कुछ लोगों को आर्मेनिया के रास्ते भारत वापस लाने की व्यवस्था की गई है।

हजारों भारतीय सीमा पार कर चुके

जयशंकर ने बताया कि अब तक लगभग 67 हजार भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंच चुके हैं। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि संकटग्रस्त क्षेत्रों में मौजूद भारतीयों को हर संभव सहायता मिल सके।

उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियां लगातार संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।

मानवीय आधार पर भारत की पहल

विदेश मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि मौजूदा हालात के बीच भारत ने मानवीय आधार पर कुछ कदम उठाए हैं। उदाहरण के तौर पर ईरान के युद्धपोत ‘लवन’ को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी गई थी।

उन्होंने कहा कि इस फैसले के लिए ईरान की ओर से भारत के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया है। जयशंकर के अनुसार भारत क्षेत्रीय तनाव के बीच भी मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखने और संवाद के रास्ते को महत्व देता है।

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