UCCBill – गुजरात में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित, नई पहल से बदला माहौल…
UCCBill – गुजरात विधानसभा ने समान नागरिक संहिता से जुड़ा विधेयक पारित कर दिया है, जिससे राज्य इस तरह का कानून लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। इससे पहले उत्तराखंड में यह व्यवस्था लागू की जा चुकी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम लंबे समय से चली आ रही नीति और सोच का परिणाम है, जिसे अब लागू किया गया है।

सरकार ने फैसले को बताया सोच-समझकर उठाया कदम
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने इस विधेयक को लेकर कहा कि यह निर्णय किसी तात्कालिक स्थिति में नहीं लिया गया, बल्कि वर्षों की वैचारिक प्रक्रिया के बाद इसे अमल में लाया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ की अवधारणा को मजबूत करती है। उनके अनुसार, इससे अलग-अलग समुदायों के लिए लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान व्यवस्था स्थापित होगी।
निजी कानूनों में आएगा एकरूपता का बदलाव
इस कानून के लागू होने के बाद विवाह, तलाक, गोद लेने, संपत्ति और अभिभावकता जैसे विषयों पर एक समान कानूनी ढांचा तैयार होगा। अभी तक इन मामलों में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग नियम लागू होते रहे हैं। सरकार का मानना है कि एकरूपता आने से कानूनी प्रक्रिया सरल होगी और सभी नागरिकों को समान अधिकार मिल सकेंगे।
महिलाओं के अधिकारों पर दिया गया जोर
भाजपा नेताओं ने इस विधेयक को विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि समान कानून लागू होने से महिलाओं को अधिक सुरक्षा और अधिकार मिलेंगे। विश्वकर्मा ने इसे पार्टी की वैचारिक प्रतिबद्धता से जोड़ते हुए कहा कि यह कदम लंबे समय से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा की ओर से विपक्ष पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने लंबे समय तक इस विषय को राजनीतिक कारणों से टालने की कोशिश की। वहीं विपक्ष का मानना है कि ऐसे कानूनों पर व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी होती है। इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं।
संवैधानिक प्रावधानों का हवाला
सरकार का कहना है कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप है, जिसमें समान नागरिक संहिता की बात कही गई है। राज्य सरकार ने इसे एक ऐसी पहल बताया है, जिससे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित किए जा सकें। साथ ही, इसे शासन के उस दृष्टिकोण से भी जोड़ा गया है, जिसमें सभी के लिए समान न्याय की बात कही जाती है।
इस विधेयक के पारित होने के बाद अब नजर इस बात पर होगी कि इसके लागू होने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और इसका सामाजिक व कानूनी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है।


