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President address: संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति ने विकास, अंतरिक्ष और सामाजिक न्याय का रोडमैप रखा

President address: संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की मौजूदा प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा पर व्यापक दृष्टिकोण रखा। अपने संबोधन में उन्होंने तकनीकी प्रगति, अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की बढ़ती मौजूदगी, सामाजिक न्याय के विस्तार और भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नीति को प्रमुखता से सामने रखा। राष्ट्रपति का यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है, जब देश विकास और समावेशन—दोनों मोर्चों पर संतुलित प्रगति की राह तलाश रहा है।

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अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की बढ़ती भूमिका

राष्ट्रपति ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां देश के वैज्ञानिक आत्मविश्वास को दर्शाती हैं। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक की यात्रा को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। राष्ट्रपति के अनुसार, यह मिशन केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक space science रणनीति की मजबूत शुरुआत है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जिससे वैश्विक मंच पर देश की भूमिका और सशक्त होगी।

गगनयान मिशन और आत्मनिर्भरता पर जोर

राष्ट्रपति ने गगनयान मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उनके अनुसार, अंतरिक्ष अनुसंधान में निरंतर निवेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1984 में राकेश शर्मा की अंतरिक्ष यात्रा ने देश को गर्व का क्षण दिया था और अब एक नई पीढ़ी के साथ भारत फिर से इतिहास रचने की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

सामाजिक न्याय और कल्याण योजनाओं की प्रगति

सामाजिक न्याय के मुद्दे पर राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्र सरकार समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, विभिन्न social welfare योजनाओं का लाभ अब लगभग 95 करोड़ नागरिकों तक पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि बीते एक दशक में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के वर्तमान कार्यकाल में गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों को और अधिक सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन पर सख्त रुख

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नीति को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि public money के दुरुपयोग को रोकने और योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रपति के अनुसार, direct benefit transfer जैसी व्यवस्थाओं से यह सुनिश्चित किया गया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि पारदर्शी शासन से न केवल संसाधनों का सही उपयोग होता है, बल्कि जनता का विश्वास भी मजबूत होता है।

राजनीतिक माहौल और संसद की भूमिका

राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान सदन में कुछ समय के लिए विपक्षी हंगामा भी देखने को मिला, लेकिन सरकार ने अपने एजेंडे को स्पष्ट रूप से सामने रखा। सत्तापक्ष के नेताओं ने अंतरिक्ष उपलब्धियों और सामाजिक योजनाओं पर राष्ट्रपति के वक्तव्यों का समर्थन किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह संबोधन सरकार की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसमें technology, development और social justice को साथ लेकर चलने की कोशिश की जा रही है।

समग्र संदेश क्या रहा

कुल मिलाकर राष्ट्रपति का यह संबोधन देश के भविष्य को लेकर एक संतुलित दृष्टि प्रस्तुत करता है। इसमें एक ओर वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति की बात की गई, तो दूसरी ओर समाज के कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख को दोहराया गया। यह संदेश साफ है कि सरकार विकास के साथ-साथ समावेशन और जवाबदेही को भी समान महत्व देने की दिशा में आगे बढ़ रही है

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