PM Modi Constitution Message: देश की लोकतांत्रिक आत्मा को समर्पित एक प्रेरक संदेश
PM Modi Constitution Message: आज संविधान दिवस (Constitution Day) के अवसर पर देशभर में नागरिकों ने अपनी लोकतांत्रिक परंपरा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस खास दिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किया गया पत्र राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने वाला रहा, जिसमें उन्होंने संविधान की महानता, नागरिक कर्तव्यों की अहम भूमिका और पहली बार मत देने वाले युवाओं के लिए प्रेरक संदेश रखा।

भारत की लोकतांत्रिक यात्रा (Democratic journey) को दिशा देने वाला संविधान न केवल हमारे अधिकारों का संरक्षक है बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा विचार इस बात को स्पष्ट करते हैं कि हर नागरिक संविधान के मार्गदर्शन में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बन सकता है।
संविधान की ऐतिहासिक गरिमा और राष्ट्रीय महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में संविधान दिवस को देश के इतिहास का गौरवशाली अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि 26 नवंबर 1949 को जब संविधान सभा ने भारत के संविधान को अपनाया, तब एक नए भारत के निर्माण की नींव रखी गई। वर्ष 2015 में इस दिन को Constitution Day के रूप में मनाए जाने का निर्णय लिया गया, जिससे नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता और अधिक बढ़ी।
उन्होंने यह भी उल्लेख (Mention) किया कि भारत का संविधान सामाजिक समानता, न्याय और समावेशिता का जीवंत दस्तावेज है। यह भारत के प्रत्येक नागरिक को न सिर्फ अधिकार देता है, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने के लिए प्रेरित भी करता है।
लोकतंत्र में समान अवसर की शक्ति
प्रधानमंत्री मोदी ने भावनात्मक संदेश में संविधान को अपनी राजनीतिक यात्रा का आधार बताया। उन्होंने कहा कि एक साधारण पृष्ठभूमि (simple background) से निकलकर प्रधानमंत्री बनने तक की यात्रा संविधान द्वारा प्रदान किए गए समता और अवसर के सिद्धांतों के कारण ही संभव हो पाई।
उन्होंने 2014 और 2019 में संसद भवन (Parliament House) में प्रवेश के अपने अनुभवों को याद करते हुए कहा कि लोकतंत्र का यह मंदिर उनकी जिम्मेदारियों को और भी दृढ़ बनाता है। उनके अनुसार, संविधान ने उन्हें 24 वर्षों तक सार्वजनिक जीवन में निरंतर सेवा का अवसर दिया और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता का प्रतीक है।
बहुभाषी संविधान का प्रकाशन
संविधान दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने भारत के संविधान के ट्रांसलेटेड वर्शन को नौ भाषाओं—मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया—में जारी किया। यह कदम संविधान को देश के हर नागरिक तक अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं को सम्मान
इस अवसर पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सभी देशवासियों को शुभकामनाएं (Best wishes to the countrymen) दीं और संविधान के निर्माण में योगदान देने वाले महान नेताओं को नमन किया। उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा संविधान सभा के सभी सदस्यों की दूरदृष्टि और अथक परिश्रम को राष्ट्र के लिए प्रेरणा बताया।
उन्होंने राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, दोनों सदनों के नेताओं और सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों (representatives of political parties) का स्वागत करते हुए कहा कि संविधान भारत की एकता का प्रहरी है और यह प्रत्येक नागरिक की गरिमा का संरक्षक भी है।



