Milan2026 – विशाखापत्तनम में विदेशी युद्धपोतों का आगमन, भारत करेगा मेजबानी
Milan2026 – भारत आगामी ‘मिलन-2026’ नौसैनिक युद्धाभ्यास की तैयारियों में जुट गया है। इसी क्रम में रविवार को विशाखापत्तनम बंदरगाह पर थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका की नौसेनाओं के जहाज पहुंचे, जिनका भारतीय नौसेना ने औपचारिक स्वागत किया। यह बहुपक्षीय अभ्यास हर दो वर्ष में आयोजित किया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आपसी समन्वय और पेशेवर सहयोग को मजबूत करना है।

विदेशी जहाजों का औपचारिक स्वागत
पूर्वी नौसेना कमान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि रॉयल थाई नौसेना का अपतटीय गश्ती पोत एचटीएमएस क्राबी मिलन-2026 और अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में भाग लेने के लिए विशाखापत्तनम पहुंचा है। इसी तरह रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना का फ्रिगेट एचएमएएस वारामुंगा और श्रीलंकाई नौसेना के एसएलएनएस नंदी मित्रा तथा एसएलएनएस सागरा भी इस आयोजन का हिस्सा बनने पहुंचे हैं।
नौसेना अधिकारियों के अनुसार, इन जहाजों की मौजूदगी बहुपक्षीय सहयोग की भावना को दर्शाती है। बंदरगाह पर पारंपरिक नौसैनिक प्रोटोकॉल के तहत इनका स्वागत किया गया।
दो चरणों में होगा आयोजन
मिलन-2026 को दो अलग-अलग चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण 19 और 20 फरवरी को बंदरगाह गतिविधियों के रूप में होगा, जिसमें विचार-विमर्श, सामरिक चर्चाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल रहेंगे। दूसरा चरण 21 से 25 फरवरी तक बंगाल की खाड़ी में समुद्री अभ्यास के रूप में संपन्न होगा, जहां विभिन्न नौसेनाएं संयुक्त संचालन का अभ्यास करेंगी।
इस बार अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा के साथ मिलन अभ्यास आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में 65 देशों की भागीदारी दर्ज की गई है। कुल 71 जहाज इसमें शामिल होंगे, जिनमें 19 विदेशी युद्धपोत और भारतीय नौसेना के 45 पोत शामिल हैं। शेष पोतों में तटरक्षक बल, वाणिज्यिक जहाज और अनुसंधान पोत सम्मिलित हैं।
राष्ट्रपति करेंगे बेड़े की समीक्षा
18 फरवरी को समुद्र में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में राष्ट्रपति द्वारा जहाजों का निरीक्षण किया जाएगा। यह समारोह भारतीय नौसेना की क्षमताओं और मित्र देशों के साथ सहयोग को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। सभी भाग लेने वाले जहाजों को छह श्रेणियों में व्यवस्थित किया जाएगा, जिससे उनकी परिचालन भूमिका स्पष्ट हो सके।
आईएनएस विक्रांत पहले ही विशाखापत्तनम पहुंच चुका है और इस भव्य आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगा। नौसेना के सूत्रों का कहना है कि आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
साझा रणनीति और संवाद पर जोर
मिलन अभ्यास के दौरान समुद्री डकैती, आपदा राहत, मानवीय सहायता और अवैध गतिविधियों से निपटने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी में 25 तटीय देशों के नौसेना प्रमुख भाग ले रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका, रूस, फ्रांस और जापान सहित कई देशों के साथ संयुक्त अभ्यास सत्र निर्धारित हैं।
नौसेना अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार के अभ्यास से न केवल सामरिक तालमेल बेहतर होता है, बल्कि समुद्री क्षेत्र में विश्वास और पारदर्शिता भी बढ़ती है।
1995 से बढ़ता दायरा
मिलन अभ्यास की शुरुआत वर्ष 1995 में महज चार देशों की भागीदारी से हुई थी। समय के साथ इसका दायरा लगातार बढ़ा है और अब यह 65 देशों की नौसेनाओं को एक मंच पर लाने वाला प्रमुख बहुपक्षीय कार्यक्रम बन चुका है। यह विस्तार हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सामरिक महत्व और सहयोग की आवश्यकता को दर्शाता है।
विशाखापत्तनम में इन दिनों अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों की हलचल साफ देखी जा सकती है। विदेशी जहाजों की मौजूदगी और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का आगमन इस आयोजन को वैश्विक स्वरूप दे रहा है। आने वाले दिनों में समुद्र में होने वाले अभ्यास और औपचारिक कार्यक्रमों पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।



