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India-Bangladesh Relations – चुनाव के बाद भरोसे की नई जमीन तलाश रहे ढाका और नई दिल्ली

India-Bangladesh Relations – बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने खुले शब्दों में स्वीकार किया है कि पिछले कुछ महीनों में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में गर्मजोशी कम हुई है। उन्होंने इसे टूटन नहीं, बल्कि ठहराव बताया और भरोसा जताया कि आगामी आम चुनाव के बाद सत्ता में आने वाली निर्वाचित सरकार के साथ द्विपक्षीय संबंध फिर से गति पकड़ सकते हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ढाका गंभीर राजनीतिक बदलावों से गुजर रहा है और पड़ोसी देशों के साथ अपने संतुलन को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश कर रहा है।

तौहीद हुसैन की टिप्पणी और चुनावी संदर्भ

ढाका में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान हुसैन ने कहा कि अंतरिम शासन के दौर में भारत के साथ संवाद कुछ धीमा जरूर पड़ा, लेकिन नई दिल्ली बांग्लादेश की विदेश नीति का अहम स्तंभ बनी हुई है। उन्होंने याद दिलाया कि बांग्लादेश का राजनीतिक इतिहास, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा-समीकरण भारत से गहराई से जुड़े रहे हैं। उनकी यह टिप्पणी 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से ठीक एक सप्ताह पहले आई है, जो अगस्त 2024 के जनआंदोलन के बाद पहली बड़ी लोकतांत्रिक परीक्षा मानी जा रही है। हुसैन, जो पहले भारत में बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त रह चुके हैं, ने भरोसा जताया कि चुनी हुई सरकार पड़ोसी रिश्तों को अधिक सहज और व्यावहारिक दिशा दे सकेगी।

अंतरिम सरकार का उदय और शेख हसीना की स्थिति

मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार 5 अगस्त 2024 को बड़े छात्र आंदोलन के बाद सत्ता में आई थी, जब लंबे समय से प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा। तब से 78 वर्षीय हसीना भारत में रह रही हैं, जिसने ढाका और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक संवेदनशीलता बढ़ा दी है। हुसैन ने कहा कि संक्रमणकालीन दौर में प्राथमिकताएं घरेलू स्थिरता और संस्थागत सुधार रही हैं, इसलिए विदेश नीति के कुछ मोर्चों पर स्वाभाविक रूप से सुस्ती दिखी।

प्रत्यर्पण विवाद और रिश्तों का न्यूनतम स्तर

पिछले वर्ष बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी, जिसके बाद ढाका ने औपचारिक रूप से उनके प्रत्यर्पण की मांग की। भारत की ओर से इस मांग पर स्पष्ट रुख न अपनाने को लेकर सवाल उठे हैं। इस पर हुसैन ने कहा कि निराशावादी होने की जरूरत नहीं है और कानूनी-राजनयिक प्रक्रियाओं को समय देना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले लगभग डेढ़ साल में भारत-बांग्लादेश संबंध अपने सबसे निचले स्तर के करीब पहुंचे, खासकर तब जब ढाका ने पाकिस्तान के साथ राजनीतिक और व्यापारिक संपर्क बढ़ाए। फिर भी, उन्होंने इसे “संकट” नहीं बल्कि अस्थायी ठहराव बताया।

क्षेत्रीय समीकरण और व्यापारिक कूटनीति

हुसैन के अनुसार, दोनों देशों के बीच दूरी का एक कारण राष्ट्रीय हितों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण रहा है। अंतरिम सरकार ने इस बीच अमेरिका समेत कई देशों के साथ व्यापार वार्ताएं तेज कीं, ताकि अगली निर्वाचित सरकार पर दबाव कम पड़े। उनका मानना है कि बांग्लादेश की आर्थिक प्राथमिकताएं और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिशें स्वाभाविक हैं, लेकिन दीर्घकाल में भारत के साथ साझेदारी अनिवार्य रहेगी।

जमात-ए-इस्लामी का चुनावी घोषणापत्र

चुनाव से ठीक पहले इस्लामी कट्टरपंथी पृष्ठभूमि वाली जमात-ए-इस्लामी पार्टी ने अपना घोषणापत्र जारी कर सबको चौंकाया है। पार्टी ने इसमें भारत के साथ “रचनात्मक और दीर्घकालिक” संबंधों को प्राथमिकता देने की बात कही है। साथ ही नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैंड के साथ भी शांतिपूर्ण व सहयोगी रिश्ते बनाए रखने का वादा किया है। दिलचस्प यह है कि घोषणापत्र में चीन और पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिसे ढाका की बदलती रणनीतिक सोच के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

नीति सिद्धांत और बदली हुई भाषा

जमात ने कहा है कि उसकी विदेश नीति आपसी सम्मान, समानता और निष्पक्षता पर आधारित होगी और वह किसी भी देश के साथ टकराव नहीं चाहती। ऐतिहासिक रूप से भारत-विरोधी रुख रखने वाली यह पार्टी अब क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बांग्लादेश के दीर्घकालिक हितों के लिए जरूरी बता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव घरेलू जनमत, आर्थिक जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय दबाव—तीनों का नतीजा हो सकता है।

कुल मिलाकर, ढाका इस समय संक्रमण के मोड़ पर खड़ा है। चुनाव के बाद बनने वाली सरकार के रुख पर ही तय होगा कि भारत-बांग्लादेश संबंध पुराने भरोसे पर लौटते हैं या नई शर्तों पर आगे बढ़ते हैं। तौहीद हुसैन के बयान, प्रत्यर्पण विवाद और जमात के घोषणापत्र—तीनों मिलकर यह संकेत देते हैं कि आने वाले महीनों में दक्षिण एशिया की कूटनीति में बांग्लादेश अहम भूमिका निभाने वाला है।

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