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Diplomacy – पश्चिम एशिया तनाव के बीच जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री की हुई बातचीत

Diplomacy – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने क्षेत्र की स्थिति पर लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बनाए रखी है। इसी क्रम में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बार सीधी चर्चा हुई है।

यह बातचीत ऐसे समय हुई जब होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कई अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाज फंसे हुए हैं। भारत इन जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने और क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा बनाए रखने के प्रयासों में लगा हुआ है।

बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच कूटनीतिक संपर्क

सूत्रों के अनुसार दोनों विदेश मंत्रियों ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। क्षेत्र में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को प्रभावित करने की आशंका बढ़ा दी है।

भारत ने हमेशा से क्षेत्र में स्थिरता और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की है। इसी नीति के तहत नई दिल्ली लगातार संबंधित देशों के साथ संपर्क बनाए हुए है, ताकि हालात को और गंभीर होने से रोका जा सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों पर चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इस मार्ग से होकर दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की आपूर्ति होती है।

हालिया तनाव के कारण यहां से गुजरने वाले कई व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। जानकारी के अनुसार करीब 28 व्यापारिक जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। भारत इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय प्रयास कर रहा है।

पिछले दिनों भी हुई थीं कई बातचीत

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच पिछले कुछ दिनों में कई बार बातचीत हो चुकी है। क्षेत्र में हालात तेजी से बदलने के कारण दोनों देशों के बीच नियमित संपर्क बना हुआ है।

बीते फरवरी के अंत में अमेरिका द्वारा किए गए हमले के बाद, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी, उस समय भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। इसके बाद 5 मार्च और 10 मार्च को भी दोनों पक्षों ने स्थिति पर विचार-विमर्श किया था।

भारत की प्राथमिकता: सुरक्षा और स्थिरता

भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा है कि वह क्षेत्रीय संकटों के दौरान संवाद और संतुलित कूटनीति को प्राथमिकता देता है। पश्चिम एशिया भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

भारत की बड़ी ऊर्जा आवश्यकताएं इसी क्षेत्र से पूरी होती हैं, वहीं हजारों भारतीय नागरिक भी यहां काम करते हैं। ऐसे में क्षेत्र में अस्थिरता का असर भारत के हितों पर भी पड़ सकता है।

इसी वजह से नई दिल्ली लगातार संबंधित देशों के साथ संवाद बनाए हुए है और स्थिति पर करीबी नजर रख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक संवाद जारी रहने से संकट के बीच सहयोग और समन्वय की संभावनाएं बनी रहती हैं।

क्षेत्रीय स्थिति पर नजर

पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं और कई देशों की निगाहें इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं। भारत भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अपने नागरिकों तथा व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने को तैयार है।

कूटनीतिक स्तर पर जारी इस तरह की बातचीत को क्षेत्र में तनाव कम करने और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

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