BorderSecurity – सीमांचल और उत्तर बंगाल को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की खबर भ्रामक
BorderSecurity – हाल के दिनों में बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की चर्चा सोशल मीडिया और कुछ स्थानीय मंचों पर तेजी से फैलने लगी थी। यह चर्चा उस समय और तेज हो गई जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बैठकें कीं। इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया। हालांकि अब केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट कर दी है।

PIB फैक्ट चेक ने दावों को बताया निराधार
सरकारी सूचना इकाई PIB Fact Check ने इन सभी दावों को पूरी तरह गलत बताया है। विभाग के अनुसार भारत सरकार के स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव न तो तैयार किया गया है और न ही किसी प्रकार का प्रशासनिक पुनर्गठन विचाराधीन है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में दावा किया जा रहा था कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र के चार जिलों — पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया — को पश्चिम बंगाल के कुछ उत्तरी जिलों जैसे मालदा, उत्तर दिनाजपुर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के साथ जोड़कर एक नया प्रशासनिक ढांचा बनाया जा सकता है।
PIB का कहना है कि यह दावा पूरी तरह अफवाह है और इसे लेकर सरकार या गृह मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी अपुष्ट खबरों को साझा करने से बचें, क्योंकि इससे क्षेत्रीय संवेदनशीलता और अनावश्यक राजनीतिक तनाव पैदा हो सकता है।
सीमावर्ती इलाकों के दौरे के बाद बढ़ी अटकलें
इस पूरे मामले की चर्चा उस समय बढ़ी जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमांचल क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इन बैठकों में मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ की रोकथाम और ड्रग तस्करी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह बैठकें नियमित सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा थीं, क्योंकि यह इलाका अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास होने के कारण संवेदनशील माना जाता है। प्रशासनिक स्तर पर समय-समय पर ऐसी बैठकों का आयोजन किया जाता है ताकि कानून व्यवस्था और सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाया जा सके।
सुरक्षा कदमों को लेकर फैली गलत व्याख्या
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल में उठाए गए कुछ सुरक्षा कदमों की गलत व्याख्या के कारण यह अफवाह फैलने लगी। दरअसल भारतीय सेना ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुछ नए चौकियों की स्थापना की है। इनमें बिहार के किशनगंज क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्से भी शामिल हैं।
इसी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ राजनीतिक बयानों और स्थानीय रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि केंद्र सरकार किसी नए प्रशासनिक ढांचे की तैयारी कर रही है। हालांकि अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन कदमों का किसी नए केंद्र शासित प्रदेश के गठन से कोई संबंध नहीं है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक अहमियत
सिलीगुड़ी कॉरिडोर को भारत की सुरक्षा दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। पश्चिम बंगाल में स्थित यह संकीर्ण भूभाग लगभग 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा है और मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने का एकमात्र स्थलीय मार्ग है। इसी वजह से इसे अक्सर ‘चिकन नेक’ के नाम से भी जाना जाता है।
सरकार इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कुछ परियोजनाओं पर काम जरूर कर रही है। इनमें लगभग 40 किलोमीटर लंबी एक अंडरग्राउंड रेलवे परियोजना की योजना भी शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदा या किसी अन्य आपात स्थिति में भी पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क बाधित न हो।
हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि इस परियोजना का मकसद केवल रणनीतिक संपर्क और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इसके तहत किसी प्रकार का प्रशासनिक या भौगोलिक पुनर्गठन प्रस्तावित नहीं है।



