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Bihar Congress RJD Alliance Rift: कांग्रेस ने राजद को बताया अपनी बर्बादी का कारण, लालू के गढ़ में अब अकेले चलने की तैयारी

Bihar Congress RJD Alliance Rift: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राजद और कांग्रेस के दशकों पुराने गठबंधन की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। नवंबर में मिली करारी शिकस्त के बाद अब कांग्रेस के भीतर विद्रोह के स्वर तेज हो गए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि (Political Alliance Failure in Bihar) के कारण कांग्रेस अपनी जमीन खोती जा रही है। हार की समीक्षा के बहाने अब खुलेआम यह मांग उठने लगी है कि कांग्रेस को तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव की छाया से बाहर निकलकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनानी चाहिए।

Bihar Congress RJD Alliance Rift
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शकील अहमद खान का बड़ा हमला: ‘रिश्ता ढोने का क्या फायदा’

कांग्रेस के कद्दावर नेता शकील अहमद खान ने राजद के साथ गठबंधन को लेकर जो बयान दिया है, उसने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। उन्होंने बहुत ही तीखे शब्दों में (Internal Conflict in Mahagathbandhan) को उजागर करते हुए कहा कि जिस रिश्ते से पार्टी को कोई लाभ नहीं हो रहा, उसे बोझ की तरह ढोने का कोई मतलब नहीं है। शकील अहमद ने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार कांग्रेस के लगभग सभी छोटे-बड़े नेताओं ने आलाकमान को यह संदेश भेज दिया है कि अब राजद से किनारा कर लेना चाहिए।

‘राजद के साथ रहने से गिरती है कांग्रेस की साख’

शकील अहमद खान ने गठबंधन के सामाजिक समीकरणों पर चोट करते हुए कहा कि राजद से जुड़ाव के कारण कांग्रेस की अपनी साख मिट्टी में मिल रही है। उनका तर्क है कि (Social Engineering and Vote Bank) के लिहाज से राजद के साथ रहने पर गैर-यादव ओबीसी और ईबीसी (EBC) जातियां कांग्रेस से दूरी बना लेती हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि राजद की ‘माय’ (MY) समीकरण वाली छवि का खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ता है और वह एक खास वर्ग तक ही सिमट कर रह जाती है।

मुकेश सहनी को बनाया निशाना: शून्य परफॉरमेंस का आरोप

बिहार चुनाव में हार के कारणों का विश्लेषण करते हुए कांग्रेस ने वीआईपी पार्टी के नेता मुकेश सहनी पर भी कड़ा प्रहार किया। खान ने कहा कि (Impact of Small Parties in Alliance) को समझे बिना मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का उम्मीदवार बनाया गया, जिनका खुद का चुनावी प्रदर्शन शून्य रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे नेताओं को तवज्जो देने की वजह से जो वोट बैंक कांग्रेस की तरफ आ सकता था, वह भी गठबंधन के प्रति अविश्वास जताते हुए एनडीए के पाले में चला गया।

2025 के नतीजों ने खोल दी गठबंधन की पोल

अगर हम बिहार चुनाव परिणामों पर नजर डालें, तो कांग्रेस की स्थिति वाकई दयनीय नजर आती है। 243 सीटों वाली विधानसभा में (Bihar Assembly Election Results 2025) के दौरान राजद को केवल 25 और कांग्रेस को महज 6 सीटों पर संतोष करना पड़ा। गौर करने वाली बात यह है कि कांग्रेस ने 60 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन स्ट्राइक रेट के मामले में वह सबसे फिसड्डी साबित हुई। इस प्रदर्शन ने हाई कमान के सामने भी यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार में कांग्रेस केवल राजद की पिछलग्गू बनकर रह गई है।

एनडीए की बंपर जीत और महागठबंधन की विदाई

एक ओर जहाँ महागठबंधन अपनी हार के कारणों को लेकर आपस में भिड़ा हुआ है, वहीं भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। (NDA Landslide Victory in Bihar) के आंकड़ों को देखें तो भाजपा 89 और जदयू 85 सीटों के साथ सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। चिराग पासवान की लोजपा (RV) ने भी 19 सीटें जीतकर अपनी उपयोगिता साबित की है। कुल 202 सीटों के साथ एनडीए की जीत ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की जनता ने गठबंधन की राजनीति को सिरे से खारिज कर दिया है।

दिल्ली दरबार में पहुंचेगी बिहार कांग्रेस की नाराजगी

बिहार के कांग्रेस नेताओं की यह नाराजगी अब जल्द ही सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की चौखट तक पहुँचने वाली है। (Central Leadership on Bihar Alliance) को तय करना होगा कि क्या वे राजद के साथ रहकर 2029 के लोकसभा चुनावों का जोखिम उठाएंगे या फिर बिहार में पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने के लिए अकेले चुनाव लड़ने का साहसी फैसला लेंगे। शकील अहमद खान का यह बयान पार्टी की उस नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें वह अब पिछलग्गू की भूमिका से बाहर निकलना चाहती है।

क्या तेजस्वी और लालू बचा पाएंगे अपना कुनबा?

राजद के लिए यह स्थिति किसी बड़े संकट से कम नहीं है। एक तरफ सत्ता हाथ से चली गई और दूसरी तरफ (Future of RJD Congress Alliance) भी अब खतरे में नजर आ रहा है। तेजस्वी यादव के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अपने सहयोगियों को कैसे एकजुट रखें। यदि कांग्रेस अलग रास्ता चुनती है, तो बिहार में विपक्षी एकता पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो सकती है, जिसका सीधा लाभ आने वाले समय में एनडीए को मिलना तय माना जा रहा है।

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