AI Impact Summit 2026 India: धर्मेंद्र प्रधान ने किया बड़ा ऐलान, मोदी सरकार रचेगी एआई इम्पैक्ट समिट से नया इतिहास
AI Impact Summit 2026 India: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पोंगल के शुभ अवसर पर आईआईटी मद्रास पहुंचकर देश को एक बड़ी खुशखबरी दी है। उन्होंने घोषणा की कि भारत अगले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक भव्य शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। दुनिया भर में बढ़ती (Artificial Intelligence Trends) को देखते हुए भारत अब इस तकनीक के वैश्विक केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पोंगल का यह त्योहार न केवल परंपराओं का उत्सव रहा, बल्कि इसने आधुनिक भारत की भविष्यवादी सोच को भी एक नई दिशा प्रदान की है।

मोदी सरकार का विजन और एआई इम्पैक्ट समिट की तैयारी
अगले महीने आयोजित होने वाला यह शिखर सम्मेलन भारत की तकनीकी यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होगा। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि पूरा देश और सरकारी तंत्र इस बात पर मंथन कर रहा है कि कैसे शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में (Emerging Tech Innovation) के लाभ पहुंचाए जा सकें। प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप, यह समिट समाज के हर वर्ग को एआई की क्रांतिकारी शक्ति से जोड़ने का काम करेगी। सरकार का मानना है कि विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में इस तकनीक का सही इस्तेमाल भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
शिक्षा के क्षेत्र में एआई उत्कृष्टता केंद्र की बड़ी भूमिका
आईआईटी मद्रास में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने एआई उत्कृष्टता केंद्र की प्रगति की समीक्षा भी की। पिछले साल भारत सरकार ने शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से इस केंद्र की स्थापना की थी। अब इस (Educational Excellence Hub) के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्र और शिक्षक न केवल तकनीक का उपयोग करें, बल्कि इसमें शोध भी करें। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि आगामी समिट से पहले भारत का शिक्षा तंत्र तकनीकी रूप से कितना सशक्त हो चुका है।
पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों में होने जा रहा है बड़ा बदलाव
धर्मेंद्र प्रधान ने जोर देकर कहा कि अब हमारा शिक्षा ढांचा चाहे वह केंद्र सरकार के अधीन हो या प्रांतीय, एआई को अपनाने के लिए खुद को ढाल रहा है। आने वाले समय में (Modern Curriculum Design) को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वह वैश्विक आवश्यकताओं और भविष्य की नौकरियों के अनुकूल हो। पोंगल का यह नया साल भारतीय शिक्षा व्यवस्था में प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने के लिए एक नए संकल्प के रूप में देखा जा रहा है। कल हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह तय किया गया कि सभी एनआईटी और आईएसआर जैसे संस्थान अब पूरी तरह से टेक्नोलॉजी-प्रेमी बनेंगे।
मातृभाषा में शिक्षा और अनुसंधान को सर्वोच्च प्राथमिकता
मोदी सरकार ने एक क्रांतिकारी निर्णय लेते हुए अब स्कूली शिक्षा से लेकर पीएचडी तक मातृभाषा को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया है। शिक्षा मंत्री के अनुसार, किसी भी विषय की गहरी समझ केवल अपनी भाषा में ही संभव है, इसलिए (Mother Tongue Education Policy) को सभी भारतीय संस्थानों में मजबूती से लागू किया जाएगा। अब शोध का विषय केवल अकादमिक कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पीएचडी के छात्रों को देश की वास्तविक समस्याओं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
स्कूल से लेकर पीएचडी तक रिसर्च पर नया फोकस
भारतीय शिक्षा व्यवस्था में अब तक पीएचडी को केवल शोध पत्रों की गुणवत्ता तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब इस धारणा को बदला जा रहा है। सरकार का नया लक्ष्य (National Priority Research) को बढ़ावा देना है, ताकि हमारे वैज्ञानिक और शोधकर्ता उन चुनौतियों का समाधान ढूंढ सकें जिनका सामना देश वर्तमान में कर रहा है। स्कूल स्तर से ही बच्चों के भीतर खोजी प्रवृत्ति विकसित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे, जिससे भारत एक आत्मनिर्भर और ज्ञान-आधारित महाशक्ति बन सके।
पोंगल का सांस्कृतिक महत्व और प्रकृति के प्रति आभार
पोंगल केवल एक फसल उत्सव नहीं है, बल्कि यह तमिल समुदाय की समृद्धि और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि कैसे प्रकृति, सूर्य और किसानों का सम्मान किया जाना चाहिए। दुनिया भर में रहने वाले तमिल लोग (Cultural Heritage Celebration) के इस महापर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। यह अवसर एकता और खुशहाली का संदेश देता है, जहाँ परिवार एक साथ मिलकर नई फसल का स्वागत करते हैं और आने वाले सुखद भविष्य की कामना करते हैं।
तमिलनाडु सरकार का पोंगल उपहार और लोक कल्याण
त्योहार की खुशी को दोगुना करने के लिए तमिलनाडु सरकार ने पहले ही विशेष पोंगल उपहार पैकेज की घोषणा कर दी थी। इस पहल के तहत (Social Welfare Schemes) के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को चावल, चीनी और गन्ना प्रदान किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के हर वर्ग तक त्योहार की मिठास पहुंचे। केंद्रीय मंत्री ने भी इस सांस्कृतिक जीवंतता की सराहना की और इसे भारतीय शिक्षा में नई ऊर्जा फूंकने का एक सही समय बताया।



