TreasuryScam – हजारीबाग में करोड़ों की अवैध निकासी, तीन सिपाही गिरफ्तार
TreasuryScam – झारखंड के हजारीबाग में सरकारी कोषागार से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन सिपाहियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। शुरुआती जांच में करीब 15.41 करोड़ रुपये की अनियमित निकासी का खुलासा हुआ है, जिससे पूरे वित्तीय तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

जांच में सामने आई गड़बड़ी
मामले का खुलासा तब हुआ जब वित्त विभाग ने नियमित डेटा विश्लेषण के दौरान कुछ संदिग्ध लेन-देन पर ध्यान दिया। इसके बाद हजारीबाग के अपर समाहर्ता के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की गई। जांच के दौरान पाया गया कि आरोपियों ने अस्थायी पे-आईडी बनाकर सरकारी खाते से पैसे निकाले और उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया।
गिरफ्तार आरोपियों ने कबूली संलिप्तता
गिरफ्तार किए गए सिपाहियों की पहचान शंभू कुमार, रजनीश सिंह और धीरेंद्र सिंह के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में तीनों ने इस वित्तीय अनियमितता में अपनी भूमिका स्वीकार की है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं हो सकता और इसमें अन्य लोगों की भी संलिप्तता हो सकती है।
संदिग्ध खातों पर कार्रवाई
जांच के बाद प्रशासन ने 21 बैंक खातों को संदिग्ध मानते हुए फ्रीज कर दिया है। इन खातों में जमा लगभग 1.60 करोड़ रुपये की राशि को भी सुरक्षित कर लिया गया है। इस संबंध में जिला कोषागार पदाधिकारी की ओर से लोहसिंगना थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
लंबे समय तक चलता रहा खेल
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी राशि की निकासी लंबे समय तक कैसे होती रही और इसकी जानकारी किसी को क्यों नहीं मिली। बताया जा रहा है कि यह अनियमितता कई वर्षों से जारी थी, जिससे निगरानी व्यवस्था की कमजोरी उजागर होती है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
इससे पहले बोकारो जिले में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया था, जहां वेतन मद से करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी की गई थी। वहां भी एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया था। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
ट्रेजरी सिस्टम पर उठे सवाल
लगातार उजागर हो रही घटनाओं ने ट्रेजरी सिस्टम की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय लेन-देन की निगरानी के लिए मजबूत तकनीकी और प्रशासनिक ढांचा जरूरी है। फिलहाल प्रशासन इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकता है।



