MedicalNegligence – आदिवासी महिला की मौत पर निष्पक्ष जांच की उठी मांग
MedicalNegligence – खूंटी के बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर में उपचार के दौरान आदिवासी महिला बुधन पूर्ति की हुई मौत अब सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि जांच में चिकित्सीय लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

गलत रक्त चढ़ाने के आरोप पर जताई गंभीर चिंता
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अर्जुन मुंडा ने कहा कि यदि उपचार के दौरान महिला को गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ाया गया है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। उनके अनुसार ऐसी घटनाएं केवल किसी एक अस्पताल की कार्यप्रणाली पर ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी चिकित्सा संस्थान में रक्ताधान जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन होना आवश्यक है, ताकि इस प्रकार की घटनाओं की संभावना को रोका जा सके।
आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दे को बताया संवेदनशील
अपने पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की पहचान केवल एक राज्य के रूप में नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में किसी आदिवासी महिला की उपचार के दौरान हुई मौत को केवल व्यक्तिगत त्रासदी के रूप में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि इस मामले की पारदर्शी जांच से न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत होगी, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में लोगों का भरोसा भी कायम रहेगा।
पहले की घटनाओं का भी किया उल्लेख
अर्जुन मुंडा ने अपने पत्र में पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में वर्ष 2025 के दौरान सामने आए उस मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें थैलेसीमिया से पीड़ित जनजातीय बच्चों को कथित तौर पर एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटना सामने आई थी। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि स्वास्थ्य संस्थानों में निगरानी तंत्र, गुणवत्ता नियंत्रण और चिकित्सा प्रक्रियाओं की नियमित समीक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी चूक को रोका जा सके।
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार पर दिया जोर
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ सरकारी और निजी अस्पतालों में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने, अस्पतालों की जवाबदेही तय करने और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार इस मामले में आवश्यक कदम उठाकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करेगी।