Jharkhand Healthcare Revolution: झारखंड को देश का नया मेडिकल हब बनाने के लिए हेमंत सोरेन ने बनाया मास्टरप्लान
Jharkhand Healthcare Revolution: झारखंड की धरती अब केवल खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि उच्च स्तर की चिकित्सा शिक्षा के लिए भी जानी जाएगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के भविष्य को लेकर एक ऐसा विजन साझा किया है, जो आने वाले समय में यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी तस्वीर बदल सकता है। सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर में एक निजी मेडिकल कॉलेज के पहले बैच के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री ने (State Medical Education) को लेकर सरकार की दूरगामी सोच को जनता के सामने रखा।

अगले पांच सालों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने मंच से घोषणा की कि राज्य सरकार अगले पांच वर्षों के भीतर झारखंड में मेडिकल कॉलेजों की संख्या को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर 25 से 30 तक ले जाने का लक्ष्य रखती है। वर्तमान में राज्य में सरकारी और निजी क्षेत्रों को मिलाकर लगभग 12 कॉलेज संचालित हो रहे हैं, ऐसे में (Jharkhand Medical College expansion) का यह संकल्प काफी बड़ा और चुनौतीपूर्ण नजर आता है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता और योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है।
मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने की कवायद
सिर्फ कॉलेजों की संख्या बढ़ाना ही सरकार का मकसद नहीं है, बल्कि एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां शिक्षा और सेवा साथ-साथ चलें। सरकार एक ऐसा (Healthcare Infrastructure development) विकसित करना चाहती है, जिससे न केवल छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा मिले, बल्कि आम नागरिकों को भी उनके घर के पास आधुनिक इलाज की सुविधाएं मिल सकें। यह कदम राज्य के पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को आसान बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
चुनौतियों को अवसर में बदलने का संकल्प
हेमंत सोरेन ने इस बात को स्वीकार किया कि इतने बड़े लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए बड़ी मात्रा में संसाधनों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि (Qualified Faculty recruitment) और बेहतर आधारभूत संरचना का निर्माण करना सबसे बड़ी बाधाएं हैं। बावजूद इसके, मुख्यमंत्री का मानना है कि चुनौतियों के बीच काम करना उन्हें और अधिक ऊर्जा देता है और सरकार हर स्तर पर इन कमियों को दूर करने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है।
छोटे जिलों में शिक्षा के नए द्वार
सरायकेला-खरसावां जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत होना राज्य के संतुलित विकास का एक बेहतरीन उदाहरण है। मुख्यमंत्री के अनुसार, छोटे जिलों में उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना से न केवल (Local Youth empowerment) को बढ़ावा मिलता है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार आता है। अब स्थानीय युवाओं को डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
पलायन रोकने की दिशा में बड़ा कदम
झारखंड के दूरदराज और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव हमेशा से एक चिंता का विषय रहा है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि सरकार का ध्यान अब उन क्षेत्रों पर है जहां (Tribal Healthcare access) को बेहतर बनाया जा सके। यदि गांवों और सुदूर इलाकों में ही मेडिकल और स्वास्थ्य संस्थान खुलेंगे, तो लोगों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे राज्यों या बड़े शहरों की ओर पलायन करने की मजबूरी से छुटकारा मिल जाएगा।
क्षेत्रीय विकास और आधुनिक चिकित्सा का संगम
आदित्यपुर में निजी मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू होना इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार निजी निवेश को भी स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रोत्साहित कर रही है। (Public Private Partnership) के माध्यम से राज्य के चिकित्सा ढांचे को मजबूती दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस शुरुआत को सराहनीय बताते हुए कहा कि ऐसे संस्थान राज्य के समग्र विकास और जन-कल्याण के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होंगे।
भविष्य की उम्मीदें और सरकार का भरोसा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे ये निवेश आने वाले समय में झारखंड को एक स्वस्थ और सशक्त राज्य बनाएंगे। उन्होंने कहा कि (Quality Medical Training) प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है ताकि यहां से निकलने वाले डॉक्टर न केवल राज्य बल्कि पूरे देश की सेवा कर सकें। यह विजन यदि धरातल पर उतरा, तो झारखंड आने वाले समय में पूर्वी भारत का एक प्रमुख मेडिकल सेंटर बनकर उभरेगा।



