Illegal Mining Case Investigation: साहिबगंज के ‘पत्थर माफिया’ पर सीबीआई का सबसे बड़ा प्रहार, निकलेंगे कई रसूखदारों के काले राज…
Illegal Mining Case Investigation: झारखंड के साहिबगंज जिले में अवैध खनन की जड़ों को उखाड़ने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी ताकत झोंक दी है। वर्ष 2022 से चल रहे करोड़ों रुपये के इस बहुचर्चित मामले में जांच की तपिश अब उन रसूखदारों तक पहुंच रही है, जो अब तक खुद को कानून से ऊपर समझते थे। गुरुवार को जब सीबीआई की पांच सदस्यीय टीम ने जिला खनन कार्यालय में धावा बोला, तो पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। यह (Law enforcement action) केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन चेहरों को बेनकाब करने की कोशिश है जिन्होंने प्राकृतिक संपदा की लूट में सक्रिय भूमिका निभाई।

पुरानी फाइलों के पन्नों में दफन हैं गहरे राज
सुबह ठीक 11:09 बजे सीबीआई की टीम ने जिला खनन कार्यालय की दहलीज पर कदम रखा। कोर्ट से विधिवत सुपुर्दगी मिलने के बाद, अधिकारियों ने वर्षों पुराने रिकॉर्ड्स और फाइलों को खंगालना शुरू किया। बंद कमरों में घंटों चली इस (Document verification process) का मकसद उन कड़ियों को जोड़ना है, जो अवैध खनन के खेल को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित कर रही थीं। टीम के सदस्य बारीक नजरों से हर उस वाउचर और परमिट की जांच कर रहे हैं, जो संदिग्ध ट्रांजेक्शन की ओर इशारा करते हैं।
सर्किट हाउस से खनन दफ्तर तक की भागदौड़
जांच के दौरान हलचल सिर्फ कार्यालय तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि सर्किट हाउस और खनन विभाग के बीच अधिकारियों का आना-जाना लगा रहा। दोपहर के वक्त जब (District Mining Officer) कृष्ण कुमार किस्कू के साथ सीबीआई के सदस्य बाहर निकले, तो कयासों का बाजार गर्म हो गया। पल-पल बदलते घटनाक्रम और अधिकारियों की आवाजाही यह साफ कर रही थी कि जांच टीम के हाथ कुछ ऐसे महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं, जिन्हें पुख्ता करने के लिए फील्ड और ऑफिस दोनों मोर्चों पर काम किया जा रहा है।
सत्ता के गलियारों में हलचल और नेताओं की दस्तक
सीबीआई की मौजूदगी के बीच सर्किट हाउस में राजनीतिक चेहरों की आवाजाही ने मामले को और भी दिलचस्प बना दिया है। झामुमो के एक स्थानीय नेता का दोपहर के समय सर्किट हाउस पहुंचना और फिर गुप्त मंत्रणा के बाद बाहर निकलना कई सवाल खड़े कर रहा है। (Political influence monitoring) के इस दौर में सीबीआई की टीम हर उस शख्स पर नजर रख रही है, जो इस जांच को प्रभावित करने या संदिग्धों को बचाने की कोशिश कर सकता है। खबर लिखे जाने तक दस्तावेजों की यह सघन जांच जारी थी।
गंगा की लहरों पर जब्त जहाज का मुआयना
साहिबगंज की जांच केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि टीम उन घाटों तक भी पहुंची जहां से अवैध पत्थर की ढुलाई होती थी। सीबीआई के अधिकारियों ने सकरीगली के समदा नाला गंगा घाट जाकर ‘एमवी इंफ्रा लिंक-3’ जहाज का बारीकी से निरीक्षण किया। (Enforcement Directorate seizure) के तहत जुलाई 2022 में जब्त किए गए इस पानी के जहाज को अवैध परिवहन का मुख्य जरिया माना जाता रहा है। टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि किस तरह सुरक्षा एजेंसियों की नाक के नीचे से पत्थरों की तस्करी को अंजाम दिया जाता था।
नींबू पहाड़ और संकट मोचन माइंस पर कड़ा पहरा
सीबीआई की टीम ने उन भौगोलिक स्थलों का भी दौरा किया जो अवैध उत्खनन के केंद्र रहे हैं। महादेवगंज के चुआ मौजा स्थित नींबू पहाड़ और बासा की संकट मोचन स्टोन माइंस पर पहुंचकर अधिकारियों ने वहां मौजूद कर्मियों से कड़ी पूछताछ की। (Ground level interrogation) के दौरान टीम ने कर्मियों के मोबाइल लोकेशन और पुराने रिकॉर्ड्स का मिलान किया। पहाड़ की चोटियों से लेकर खदानों की गहराई तक सीबीआई यह देख रही है कि स्वीकृत सीमा से अधिक कितना पत्थर निकाला गया और सरकार को कितने राजस्व की चपत लगाई गई।
ईडी की जांच के बाद सीबीआई का मास्टरस्ट्रोक
गौरतलब है कि यह मामला 2022 से ही जांच के घेरे में है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पहले ही कई बड़े खुलासे कर चुका है। ईडी ने कई प्रभावशाली नेताओं, अधिकारियों और दर्जनों पत्थर कारोबारियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा था। अब जब (CBI independent investigation) शुरू हुई है, तो उन लोगों की नींद उड़ गई है जो ईडी की कार्रवाई से बच निकले थे। सीबीआई ने मामले को टेकओवर करने के बाद अपनी स्वतंत्र शैली में साक्ष्यों को जुटाना शुरू किया है, जिससे खनन जगत के सिंडिकेट में भारी डर व्याप्त है।
क्या अब थमेगा साहिबगंज में अवैध खनन का खेल?
साहिबगंज में सीबीआई की इस सक्रियता ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि भ्रष्टाचार के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए दिल्ली से कड़े निर्देश प्राप्त हैं। जिस तरह से (Illegal mining syndicate) के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए डिजिटल और भौतिक दोनों साक्ष्यों को मिलाया जा रहा है, उससे आने वाले दिनों में कई नई गिरफ्तारियां संभव हैं। जिले के आम नागरिक अब उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी प्राकृतिक विरासत को लूटने वाले सफेदपोश चेहरों का असली मुखौटा जल्द ही दुनिया के सामने होगा और न्याय की जीत होगी।



