झारखण्ड

ExamScam – तमाड़ भर्ती परीक्षा मामले में 166 आरोपी पेश, ठगी पर बढ़ी बहस

ExamScam – झारखंड के रांची जिले के तमाड़ में आयोजित उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़ा मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। कथित पेपर लीक और संगठित ठगी की आशंका के बीच पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 166 लोगों को अदालत में पेश किया है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि यह वास्तव में पेपर लीक है या फिर सुनियोजित धोखाधड़ी का मामला।

अदालत में बड़ी संख्या में आरोपियों की पेशी

सोमवार को पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सभी 166 आरोपियों को रांची सिविल कोर्ट में प्रस्तुत किया। इनमें 159 अभ्यर्थी, 5 कथित सॉल्वर गिरोह के सदस्य और 2 वाहन चालक शामिल हैं। भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए आरोपियों को 25-25 के समूह में अदालत में लाया गया, जहां उनके बयान दर्ज किए गए। इस दौरान न्यायालय परिसर में हलचल बनी रही और मामले को लेकर लोगों की उत्सुकता भी साफ दिखी।

बचाव पक्ष ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता अम्लान पालिक ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र असल में ठगी के शिकार हैं, जिन्हें झूठे वादों के जरिए फंसाया गया। उन्होंने तर्क दिया कि कुछ मामलों में प्रश्नों का आंशिक मिलान जरूर हुआ है, लेकिन इसे आधार बनाकर सभी छात्रों को दोषी ठहराना उचित नहीं है। उनके अनुसार, जिस तरह साइबर अपराधी लोगों को झांसा देकर पैसे ऐंठते हैं, उसी तरह इस गिरोह ने भी परीक्षा में सफलता दिलाने का लालच देकर अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाया।

पुलिस जांच में सामने आए नए तथ्य

वहीं पुलिस का पक्ष इससे अलग है। जांच अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ के दौरान कई अभ्यर्थियों ने सॉल्वर गैंग से संपर्क करने और रकम देने की बात स्वीकार की है। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने शहर में अलग-अलग स्थानों पर पिकअप प्वाइंट बना रखे थे, जहां अभ्यर्थियों को कथित प्रश्नपत्र दिखाए जाते थे और फिर उन्हें परीक्षा केंद्र तक ले जाया जाता था। कुछ अभ्यर्थियों ने 10 से 15 लाख रुपये तक भुगतान करने की बात भी कबूल की है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

पेपर लीक या ठगी, जांच का केंद्र यही सवाल

मामले की जांच के दौरान सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या वास्तव में परीक्षा का पेपर लीक हुआ था या फिर यह पूरी तरह ठगी का नेटवर्क था। पुलिस फिलहाल दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य और पूछताछ के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।

पुलिस का रुख और मुख्य आरोपी की तलाश

ग्रामीण एसपी पारस राणा ने स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक जांच में इसे पेपर लीक के बजाय ठगी का मामला माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी अतुल वत्स है, जिसका आपराधिक इतिहास पहले से रहा है और वह कई मामलों में वांछित भी है। पुलिस अब उसके नेटवर्क और सहयोगियों की तलाश में जुटी है।

आगे की कार्रवाई और जांच जारी

अदालत ने सभी आरोपियों को रिमांड पर भेज दिया है, जिससे पुलिस को पूछताछ के लिए समय मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की हर परत को खोलने की कोशिश की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और किस स्तर पर गड़बड़ी हुई। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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