TrumpIranTalks – ईरान समझौते पर ट्रंप की नई चेतावनी
TrumpIranTalks – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को लेकर सख्त रुख जाहिर किया है। वाशिंगटन में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि तेहरान को बातचीत की राह चुननी होगी, अन्यथा हालात गंभीर हो सकते हैं। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह टकराव नहीं चाहते, लेकिन यदि समझौता नहीं हुआ तो परिणाम ईरान के लिए कठिन होंगे।

उन्होंने संकेत दिया कि पहले भी अवसर था जब समझौता किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ट्रंप के अनुसार, अब भी कूटनीतिक रास्ता खुला है, मगर अंतिम निर्णय अमेरिका के हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।
नेतन्याहू संग बैठक पर बयान
इसी बीच, ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई अपनी हालिया बैठक को सकारात्मक बताया। यह मुलाकात वाशिंगटन में हुई, जहां दोनों नेताओं ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के बाद ट्रंप ने कहा कि वार्ता रचनात्मक रही और दोनों पक्ष कई मुद्दों पर एकमत दिखे। उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि ईरान बातचीत के लिए आगे नहीं आता, तो अमेरिका अपने विकल्पों पर विचार करेगा। ट्रंप ने पूर्व में की गई सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने ईरान को चेतावनी के रूप में पेश किया।
‘मिडनाइट हैमर’ का संदर्भ
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में ‘मिडनाइट हैमर’ का उल्लेख किया, जो जून 2025 में ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर की गई अमेरिकी कार्रवाई से जुड़ा है। हालांकि उस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आई थीं, ट्रंप ने इसे अमेरिका की दृढ़ नीति का उदाहरण बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि यह भी देखा जा रहा है कि अमेरिका औपचारिक वार्ता के विकल्प को पूरी तरह बंद नहीं कर रहा है।
नेतन्याहू का रुख
वाशिंगटन दौरे के बाद इजरायल लौटते समय नेतन्याहू ने भी मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि ईरान को एक बेहतर और व्यापक समझौते के लिए तैयार किया जा सकता है। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि उन्होंने अमेरिका के सामने अपनी शंकाएं स्पष्ट रूप से रखी हैं।
उनका कहना था कि किसी भी संभावित समझौते में केवल परमाणु कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि बैलिस्टिक मिसाइलें और ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों की गतिविधियां भी शामिल होनी चाहिए। नेतन्याहू ने इसे इजरायल की सुरक्षा और व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्थिरता से जुड़ा मुद्दा बताया।
कूटनीति और क्षेत्रीय संतुलन
मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव कोई नया विषय नहीं है। बीते वर्षों में परमाणु समझौते को लेकर कई दौर की बातचीत और मतभेद सामने आए हैं। वर्तमान बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्रीय सुरक्षा पर वैश्विक निगाहें टिकी हुई हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयान अक्सर वार्ता की दिशा को प्रभावित करते हैं। हालांकि अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित पक्ष किस हद तक लचीला रुख अपनाते हैं।
फिलहाल अमेरिका और इजरायल के बीच समन्वय स्पष्ट दिख रहा है, जबकि ईरान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं, क्योंकि परमाणु मुद्दा न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा से भी जुड़ा है।



