TerrorRecruitment – बदली रणनीति से युवाओं को जोड़ने की कोशिश में आईएसआई
TerrorRecruitment – हाल के खुफिया आकलनों से संकेत मिल रहे हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपनी भर्ती रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। बताया जा रहा है कि आतंक से जुड़े नेटवर्क में पहले जैसी सक्रियता अब नहीं दिख रही, जिसका एक कारण हाल के वर्षों में हुई सैन्य कार्रवाइयों को माना जा रहा है। इन अभियानों के बाद आतंकी ढांचे को झटका लगा है, जिससे नए लोगों की भर्ती प्रभावित हुई है। ऐसे में अब युवाओं को जोड़ने के लिए नए तरीके अपनाए जा रहे हैं, जिनमें आर्थिक प्रलोभन प्रमुख भूमिका निभा रहा है।

भर्ती में गिरावट के बाद बदला गया तरीका
खुफिया सूत्रों के अनुसार, पहले जिन संगठनों में शामिल होना अपेक्षाकृत आसान माना जाता था, वहां अब नए लोगों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। अनुमान है कि भर्ती में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। इस स्थिति ने रणनीतिक स्तर पर बदलाव को मजबूर किया है। अब वैचारिक अपील या धार्मिक आधार के बजाय सीधे आर्थिक लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को आकर्षित किया जा सके।
आर्थिक प्रलोभन पर आधारित नई योजना
सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में युवाओं को पैसे और बेहतर जीवनशैली का लालच देकर जोड़ने की कोशिश की जा रही है। भर्ती के लिए अलग-अलग स्तर तय किए गए हैं, जिनमें काम के प्रकार के अनुसार भुगतान भी अलग-अलग बताया जा रहा है। कुछ मामलों में यह रकम दस हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक हो सकती है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि पारंपरिक तरीकों की प्रभावशीलता कम होने के बाद अब व्यावहारिक और त्वरित लाभ देने वाली रणनीति अपनाई जा रही है।
पंजाब में नशे की समस्या का उठाया जा रहा फायदा
खुफिया एजेंसियों ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ क्षेत्रों में सामाजिक समस्याओं का इस्तेमाल भर्ती के लिए किया जा रहा है। खासकर पंजाब में नशे की समस्या को एक माध्यम के रूप में देखा जा रहा है, जहां आर्थिक जरूरत और लत दोनों का फायदा उठाकर युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य केवल भर्ती तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क तैयार करना भी बताया जा रहा है।
सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स पर नजर रखने की सलाह
सुरक्षा एजेंसियों ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सतर्क रहने की सलाह दी है। खास तौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अधिक फॉलोअर्स वाले अकाउंट्स पर नजर रखने को कहा गया है। आशंका जताई गई है कि इन माध्यमों का उपयोग करके युवाओं को प्रभावित किया जा सकता है और एक खास तरह का नैरेटिव तैयार किया जा सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह पहल अहम मानी जा रही है।
क्षेत्रीय हालात और बढ़ती चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय कई मोर्चों पर दबाव झेल रहा है। एक ओर आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां हैं, तो दूसरी ओर सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय समूहों के साथ टकराव भी जारी है। ऐसे हालात में नई भर्ती रणनीति को इन समूहों को फिर से सक्रिय करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। यह स्थिति क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती पैदा कर सकती है।
युवाओं को लक्ष्य बनाकर बढ़ती गतिविधियां
खुफिया जानकारी के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में छात्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को प्राथमिक लक्ष्य बनाया जा रहा है। हालांकि कुछ मामलों में बेहतर जीवनशैली और तेज कमाई की चाह भी एक कारण बन रही है। यह रुझान इस बात की ओर इशारा करता है कि भर्ती केवल मजबूरी का परिणाम नहीं, बल्कि आकर्षण का भी हिस्सा बनती जा रही है।



