SriLankaFuelCrisis – ईंधन संकट के बीच इस देश ने लिया हफ्ते में चार दिन काम करने का फैसला
SriLankaFuelCrisis – श्रीलंका सरकार ने ईंधन की कमी को ध्यान में रखते हुए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। देश में अब सप्ताह में केवल चार दिन ही काम होगा। यह कदम पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य सीमित ईंधन संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है, ताकि आवश्यक सेवाओं को लंबे समय तक बनाए रखा जा सके।

तेल आपूर्ति बाधित होने से बढ़ी चिंता
मौजूदा हालात की जड़ पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव है, जिसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है। यही कारण है कि श्रीलंका जैसे आयात पर निर्भर देश को संभावित संकट का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी संस्थानों के लिए नया कार्य शेड्यूल
अधिकारियों के अनुसार, नए नियम के तहत सभी सरकारी दफ्तर सप्ताह में चार दिन ही खुलेंगे। यह व्यवस्था स्कूलों और विश्वविद्यालयों पर भी लागू होगी। सरकार ने निजी क्षेत्र से भी सहयोग की अपील करते हुए सप्ताह में एक अतिरिक्त अवकाश देने का सुझाव दिया है, ताकि ईंधन की खपत को कम किया जा सके।
आपात बैठक के बाद लिया गया निर्णय
यह फैसला राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद लिया गया। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे संभावित गंभीर परिस्थितियों के लिए पहले से तैयारी रखें। हालांकि, अस्पताल, बंदरगाह और अन्य जरूरी सेवाएं पहले की तरह सामान्य रूप से जारी रहेंगी।
सार्वजनिक गतिविधियों पर भी असर
सरकार ने ईंधन बचत के मद्देनजर सार्वजनिक कार्यक्रमों और आयोजनों पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों को जहां संभव हो, वहां घर से काम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इससे परिवहन पर दबाव कम करने की कोशिश की जा रही है।
तेल की राशनिंग लागू
देश में ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के लिए राशनिंग प्रणाली भी लागू कर दी गई है। निजी वाहनों के लिए साप्ताहिक सीमा तय कर दी गई है, जबकि सार्वजनिक परिवहन के लिए अलग कोटा निर्धारित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान भंडार सीमित समय तक ही पर्याप्त रहेगा।
आर्थिक स्थिति पर भी मंडरा रहा खतरा
सरकार को आशंका है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो देश की अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। श्रीलंका पहले ही हाल के वर्षों में आर्थिक संकट का सामना कर चुका है और अब वह अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता के सहारे धीरे-धीरे उबरने की कोशिश कर रहा है।
आगे की स्थिति पर नजर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि हालात के अनुसार आगे भी नीतियों में बदलाव किया जा सकता है। फिलहाल प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सीमित संसाधनों का सही उपयोग हो और जरूरी सेवाएं बाधित न हों।


