NuclearWeapons – 13 फरवरी को फ्रांस बना था परमाणु शक्ति
NuclearWeapons – दुनिया की सामरिक राजनीति में परमाणु हथियारों की भूमिका दशकों से निर्णायक रही है। 13 फरवरी की तारीख इसी संदर्भ में खास महत्व रखती है, क्योंकि इसी दिन फ्रांस ने अपना पहला परमाणु परीक्षण कर वैश्विक शक्ति संतुलन में नई उपस्थिति दर्ज कराई थी। उस परीक्षण के बाद फ्रांस अमेरिका, सोवियत संघ और ब्रिटेन के बाद परमाणु क्षमता हासिल करने वाला चौथा देश बना। आज जब विश्व में हजारों परमाणु हथियार मौजूद हैं, तब इस ऐतिहासिक घटना को समझना और भी जरूरी हो जाता है।

परमाणु परीक्षण का ऐतिहासिक संदर्भ
फ्रांस ने 13 फरवरी 1960 को अल्जीरिया के रेगिस्तानी इलाके में अपना पहला परमाणु विस्फोट किया। इस परीक्षण का नाम ‘गेरबोइस ब्लू’ रखा गया था। उस समय अल्जीरिया फ्रांस के नियंत्रण में था। यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया था, बल्कि इसके पीछे कई वर्षों की राजनीतिक और रणनीतिक पृष्ठभूमि थी।
1956 के स्वेज नहर संकट ने फ्रांस की विदेश नीति को गहराई से प्रभावित किया। उस दौरान अमेरिका से अपेक्षित समर्थन न मिलने पर फ्रांसीसी नेतृत्व ने महसूस किया कि वैश्विक मंच पर स्वतंत्र रणनीतिक ताकत बनना आवश्यक है। तत्कालीन राष्ट्रपति चार्ल्स डी गॉल ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक स्वायत्तता को प्राथमिकता दी। यही सोच आगे चलकर फ्रांस के परमाणु कार्यक्रम की नींव बनी।
अल्जीरिया से फ्रेंच पोलिनेशिया तक परीक्षण
पहले परीक्षण के बाद फ्रांस ने 1966 तक अल्जीरिया में कई और परमाणु परीक्षण किए। इसके बाद परीक्षणों का स्थान बदलकर फ्रेंच पोलिनेशिया कर दिया गया। 1996 तक फ्रांस कुल 210 परमाणु परीक्षण कर चुका था।
1968 में फ्रांस ने थर्मोन्यूक्लियर हथियार विकसित कर अपनी क्षमता को और मजबूत किया। इस उपलब्धि ने उसे उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर दिया जिनके पास उन्नत परमाणु तकनीक थी। हालांकि बाद के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय दबाव और परमाणु अप्रसार समझौतों के चलते परीक्षणों पर रोक लगाई गई।
वर्तमान में फ्रांस की परमाणु क्षमता
हाल के अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार, फ्रांस के पास लगभग 290 परमाणु हथियार मौजूद हैं। ये हथियार उसकी सामरिक निवारक नीति का हिस्सा हैं। फ्रांस की परमाणु रणनीति मुख्यतः समुद्र और वायु आधारित प्रणालियों पर आधारित है।
फ्रांस का रुख यह रहा है कि उसकी परमाणु क्षमता केवल निवारक भूमिका निभाती है और इसका उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे से देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि परमाणु हथियारों की मौजूदगी वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और नैतिकता से जुड़े सवाल भी उठाती रही है।
दुनिया में परमाणु हथियारों का संतुलन
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में रूस और अमेरिका के पास सबसे अधिक परमाणु हथियार हैं। रूस के पास 5,459 और अमेरिका के पास 5,177 हथियार बताए जाते हैं। चीन के पास लगभग 600, फ्रांस के पास 290 और ब्रिटेन के पास 225 परमाणु हथियार हैं।
दक्षिण एशिया में भारत के पास लगभग 180 और पाकिस्तान के पास करीब 170 परमाणु हथियार होने का अनुमान है। इजरायल के पास लगभग 90 और उत्तर कोरिया के पास लगभग 50 परमाणु हथियार बताए जाते हैं। ये आंकड़े समय-समय पर बदलते रहते हैं और विभिन्न स्रोतों में अंतर भी हो सकता है।
वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव
परमाणु हथियारों की मौजूदगी को कुछ देश सुरक्षा की गारंटी मानते हैं, जबकि कई विशेषज्ञ इसे वैश्विक जोखिम का कारण बताते हैं। शीत युद्ध के दौर से लेकर आज तक परमाणु संतुलन की अवधारणा ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित किया है।
फ्रांस का 1960 का परीक्षण इस व्यापक परिदृश्य का अहम अध्याय था। आज भी परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण को लेकर वैश्विक मंच पर बहस जारी है। 13 फरवरी की तारीख इस इतिहास की याद दिलाती है कि कैसे एक फैसले ने विश्व शक्ति संरचना को नया आयाम दिया।



