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Nicolas Maduro Detention: युग का अंत! तेल और सत्ता की जंग में अमेरिका की हुई बड़ी जीत

Nicolas Maduro Detention: दक्षिण अमेरिका के राजनीतिक पटल पर एक युग का अंत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर दुनिया को चौंका दिया है। यह (Military Intervention) कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि महीनों से चल रही धमकियों और कूटनीतिक दबाव का परिणाम थी। मादुरो, जिन्होंने एक दशक से अधिक समय तक वेनेजुएला पर राज किया, अब न्यूयॉर्क की जेल में अपनी किस्मत का फैसला होने का इंतजार कर रहे हैं।

Nicolas Maduro Detention
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तेल की राजनीति और ट्रंप का कबूलनामा

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट कर दिया कि इस पूरी सैन्य कार्रवाई के पीछे का असली खेल ‘तेल’ (Global Oil Politics) से जुड़ा है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, और अमेरिका लंबे समय से मादुरो के वामपंथी शासन को अपने हितों के लिए खतरा मानता रहा है। ट्रंप की इस टिप्पणी ने उन दावों को पुख्ता कर दिया है कि यह ऑपरेशन केवल लोकतंत्र की बहाली के लिए नहीं, बल्कि ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण पाने के लिए था।

हथकड़ी में कैद एक राष्ट्रपति की तस्वीर

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘ट्रूथ सोशल’ पर एक ऐसी तस्वीर साझा की जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मचा दी। तस्वीर में वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति (Former President) एक नौसैनिक जहाज पर हथकड़ी लगे और आंखों पर पट्टी बंधे हुए नजर आ रहे हैं। यह छवि अमेरिकी प्रभुत्व और ‘डेल्टा फोर्स’ जैसी इकाइयों की ताकत का प्रदर्शन करने के लिए जारी की गई थी। मादुरो पर 5 करोड़ डॉलर का इनाम था, और अब उन्हें नशीली दवाओं की तस्करी और अवैध हथियारों के आरोपों में मुकदमे का सामना करना होगा।

सत्ता परिवर्तन का वैश्विक असर

मादुरो के पतन के साथ ही दक्षिण अमेरिका में वामपंथी विचारधारा को एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिका ने इसे (Regime Change) के एक सफल उदाहरण के रूप में पेश किया है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इस तरह की सैन्य कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए हैं। क्या एक संप्रभु राष्ट्र के प्रमुख को इस तरह हिरासत में लेना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सही है? यह बहस अब पूरे विश्व में छिड़ गई है।

वेनेजुएला का अनिश्चित भविष्य

मादुरो के जाने के बाद वेनेजुएला में एक राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है। हालांकि अमेरिका ने वहां नई व्यवस्था की बात की है, लेकिन जमीनी हकीकत (Economic Crisis) और जनता के आक्रोश के कारण चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। देश की चरमराती अर्थव्यवस्था और तेल उत्पादन को दोबारा पटरी पर लाना नई सरकार के लिए आसान नहीं होगा। ट्रंप की इस ‘तेल नीति’ का असर आने वाले समय में वैश्विक ईंधन कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

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